स्वयं अक्षर ज्ञान नहीं रखने वाली पूजा कहती हैं कि उनकी दो बड़ी बेटियां नगर के प्राइमरी स्कूल में पढ़ रही हैं, जबकि दो छोटी बेटियों को आंगनबाड़ी में भेजा है।
दिन भर फुटपाथ पर बैठकर लोहे के बर्तन बेचने वाली पूजा बेटा-बेटी में फर्क नहीं समझती हैं। कहती हैं कि उनकी जिंदगी भले ही जैसी भी हो, लेकिन वह बेटियों को पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर या शिक्षक बनाना चाहती हैं।
कहती हैं कि चारों बेटियों को पढ़ाने के लिए आगे और भी मेहनत करनी पड़ेगी, जिसके लिए वह तैयार हैं। पति लाल सिंह के साथ लोहे के बर्तन बनाने से लेकर बेचने तक का काम करने वाली पूजा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी देती हैं। पूजा औरों को भी बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित करती हैं।
घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अजय ने कहा कि यदि हर मां-बाप में यह सोच हो तो हर बच्चे को शिक्षित किया जा सकता है। सोसायटी ने धूप-बारिश में फुटपाथ पर बैठकर लोहे के बर्तन बेचकर बेटियों को पढ़ा रही पूजा को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।