भावना (परिवर्तित नाम) वह अभागी मां है, जो नाबालिग है और कागजों में जिसका पता हरिद्वार दर्ज है।
मां बनना किसी प्रताड़ना से कम नहीं
उसने शुक्रवार को महंत इंदिरेश अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। मानसिक रूप से अस्वस्थ भावना के लिए मां बनना किसी प्रताड़ना से कम नहीं था।
मां होने का अर्थ भी उसे नहीं मालूम, लेकिन ममत्व का भाव कुछ ऐसा बहा कि वह बच्ची को गले लगाने के लिए आंसू बहाती रही।
निकेतन के स्टाफ को बार-बार वह कक्ष दिखाती रही, जहां उसकी बच्ची को रखा गया था। स्टाफ से पूछा तो पता चला कि बच्ची के पास जाने की जिद कर रही है, लेकिन अभी वह वेंटिलेटर पर है।
अस्पताल के प्रसूति विभाग में यूनिट -1 के बेड पर पीले सूट में पैर नीचे किए बैठी भावना से अमर उजाला ने जब पूछा-मां की याद आती है? तो उसकी आंखें डबडबा गईं।
कई सवालों पर खामोश हो गई भावना
भावना कहने को मानसिक रूप से ठीक नहीं है, लेकिन ममता तो ममता ठहरी। बच्ची के नाम पर कभी उसकी आंखें भरीं, तो कभी चेहरे पर स्नेहमयी मुस्कान भी तैरी।
घर-परिवार के बारे में पूछा तो कभी तुतलाकर, कभी हाथ के इशारे से सवालों के जवाब देती रही। कई सवालों पर खामोश हो गई।
पता चला कि वह कभी स्कूल नहीं गई। दो भाई और बहनें भी परिवार में हैं। मां और बापू भी। इससे ज्यादा कुछ भी उसके हलक से नहीं निकलता।
बच्ची की हालत ठीक नहीं
अस्पताल का स्टाफ बताता है कि भावना की बच्ची की हालत ठीक नहीं है। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। उसका वजन भी कम है। भावना की तो शनिवार दोपहर बाद छुट्टी हो गई।
उसे नारी निकेतन ले जाया गया है, लेकिन ठीक हो जाने तक बच्ची को अस्पताल में ही डाक्टरों की देख-रेख में रखा जाएगा।