स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की कही बात
रेसकोर्स इलाके में 13 अगस्त की दोपहर पुलिसकर्मियों से मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने की आरोपी संतोष रावत व उनकी बेटी बुधवार को मानवाधिकार आयोग पहुंचे। उन्होंने आयोग में शिकायतपत्र देकर नेहरू कॉलोनी पुलिस पर संगीन आरोप लगाए। आयोग ने उन्हें सुनने के बाद पूरे प्रकरण की स्वतंत्र संस्था से जांच कराने की बात कही। साथ ही 25 अगस्त को सुबह 10:30 बजे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह को स्वयं आकर जवाब देने का आदेश दिया।
आयोग की अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विजय कुमार बिष्ट ने टिप्पणी की है कि महिला और उनकी बेटी की शिकायत से स्पष्ट होता है कि उनके मानव अधिकारों का बुरी तरह से उल्लंघन किया गया। कहने के लिए उत्तराखंड पुलिस मित्र पुलिस कही जाती है लेकिन उनकी कार्यप्रणाली सभ्य समाज को सोचने पर मजबूर करती है। आयोग ने आदेश की कॉपी शासन में मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को ई-मेल से भेजने का निर्देश दिया।
इस संबंध में एसएसपी अजय सिंह ने कहा है कि प्राथमिक जांच में महिला और उनकी बेटी के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस के पास घटनास्थल से लेकर थाने तक के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित हैं, जिनके अवलोकन से आरोप गलत प्रतीत हो रहे हैं। मामले में एसपी सिटी को भी परीक्षण के निर्देश दिए हैं, जिससे जांच में और स्पष्टता आ जाएगी।
पीड़ित संतोष रावत और उनकी बेटी ने आरोप लगाया था कि 13 अगस्त की दोपहर करीब डेढ़ बजे उनके घर के बाहर पड़ोसी मंजीत सिंह और उनके परिवार के साथ नेहरू कॉलोनी थाने के कुछ पुलिसकर्मी आए। उन्होंने बिना अनुमति के उनके घर के सामने बिजली के खंभे से तार जोड़ने की कोशिश की। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने गाली-गलौज की। घटना का वीडियो बनाने लगे तो धमकी देकर चले गए। यह शिकायत सीएम पोर्टल पर ऑनलाइन की तो आरोप है कि पुलिसकर्मी गुस्सा हो गए। शाम करीब चार बजे उनके घर में घुसे और मारपीट करके थाने ले गए। आरोपों के क्रम में कहा है कि थाने में उन्हें बेल्टों से मारा और मुंह में जबरदस्ती कील डालकर पानी पिलाया।