देहरादून में अचानक हुई परीक्षा में भौतिकी के अधिकतर शिक्षक फेल हो गए। मौका था इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स और श्री गुरु राम राय एजूकेशन मिशन की ओर से ‘भौतिकी में प्रयोग’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला का।
गच्चा खा गए गुरुजी
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर एचसी वर्मा ने कुछ फार्मूले पूछे तो गुरुजी गच्चा खा गए। कार्यशाला का शुभारंभ शनिवार को एसजीआरआर रेसकोर्स में एसजीआरआर पीजी कॉलेज प्राचार्य प्रो. वीए बौड़ाई ने किया।
इस मौके पर आईआईटी कानपुर से आए प्रोफेसर एचसी वर्मा ने शिक्षकों को भौतिकी के व्यवहारिक फार्मूले बताए। उन्होंने कुछ उपकरणों को प्रदर्शित कर जब शिक्षकों से इस पर लागू होने वाले बल और भौतिकी के दूसरे फॉर्मूले पूछे तो शिक्षक निरुत्तर नजर आए।
कई शिक्षकों ने हवा में तीर चलाए लेकिन ज्यादातर सही जवाब नहीं दे पाए। हालांकि शिक्षकों ने प्रो. वर्मा से सवाल जरूर पूछे।
इस कार्यशाला में देहरादून के अलावा कई और जिलों के शिक्षकों सहित प्रो. बीपी त्यागी, वेल्हम ब्वॉयज स्कूल के उप प्राचार्य महेश कांडपाल, वीके नौटियाल, जीएस राणा, डॉ. एएस राणा, एसजीआरआर रेसकोर्स प्राचार्य प्रतिभा अत्री, आशीष जोशी, संतोष चमोला, आशीष गोदियाल आदि मौजूद रहे।
व्यवहारिक ज्ञान जरूरी
प्रो. एचसी वर्मा ने कहा कि कठिन प्रक्रिया से चयनित होने के बाद भी आईआईटी में दाखिला ले रहे छात्रों का ज्ञान संतोषजनक नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षक जिम्मेदार हैं।
अगर न्यूटन क्लासरूम में ही बैठे रहते तो शायद वह पेड़ से नीचे गिरे सेब को आधार बनाकर गुरुत्वाकर्षण नियम न दे पाते।
इसलिए जरूरी है कि शिक्षक भी बच्चों को भौतिकी का व्यवहारिक ज्ञान दें। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों में आईआईटी का जो योगदान समाज में होना चाहिए था, अभी तक वह इससे दूर ही है।