जेलें फुल हो जाएं मगर समाज का दम नहीं फूलना चाहिए
इनमें अधिकांश जमानत मिलने के इंतजार में जेल में बंद हैं। यह अलग बात है कि जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि भले जेलों का दम एक बार को फूल जाए, पर अपराध में लिप्त आरोपियों के आसानी से बाहर आने से समाज का दम नहीं फूलना चाहिए। इसलिए ज्यादातर मामलों में पुलिस उन्हें जमानत दिए जाने का विरोध करती है। अदालतों में पुलिस का यही तर्क रहता है कि विचाराधीन कैदी को यदि जमानत दी गई तो वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है या फिर अपराध में लिप्त हो सकता है।
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11 में से नौ जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी
यह खुलासा कारागार मुख्यालय द्वारा नदीम उद्दीम को उपलब्ध कराई सूचना से हुआ है। नदीम का कहना है कि उन्होंने राज्य की सभी जेलों में कैदियों की संख्या और जेलों की क्षमता के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें 11 जेलों की जानकारी मिली है। इनमें केवल दो जेलों को छोड़कर सभी नौ जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। इसमें भी 37 प्रतिशत ही सजायाफ्ता हैं, बाकी 63 प्रतिशत विचाराधीन कैदी बंद हैं। प्रदेश में सिर्फ संपूर्णानंद शिविर जेल, सितारगंज (खुली जेल) तथा जिला कारागार चमोली में क्षमता से कम कैदी हैं, बाकी में लगभग तीन गुना हैं।
जिला कारागार का नाम क्षमता विचाराधीन सजायाफ्ता कैदी
देहरादून 580 907 369
हरिद्वार 888 684 566
नैनीताल 71 117 10
अल्मोड़ा 102 183 40
चमोली 169 83 41
टिहरी 150 106 81
पौड़ी 150 98 69
हल्द्वानी 635 1310 140
रुड़की 244 363 28
सम्पूर्णानंद शिविर, सितारगंज 300 0 48
केंद्रीय कारागार सितारगंज 552 29 778