एक्सपर्ट की मानें तो बनबसा स्थित सेना छावनी की फायरिंग रेंज (चांदमारी मैदान) छोटी है। इसमें मोर्टार फायर करने की सुविधा नहीं है। यहां स्थित फायरिंग रेंज केवल राइफलों के लिए है, जिसमें थ्री नाट थ्री, एके 47, इनसांस और एसाल्ट के अलावा कार्बाइन से ही फायरिंग का अभ्यास किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि यहां बीते दिवस मिला मोर्टार शेल कहीं बाहर से ही लाया गया होगा।
दस वर्ग फुट है मोर्टार शेल की मारक क्षमता
गौरव सेनानी कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद और सेवानिवृत्त कै. विरेंद्र रजवार ने बताया कि 81 एमएम मोर्टार शेल अगर एक्टिव है तो काफी खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि ट्राइपौड पर गन को रख इस शेल को फायर किया जाता है। इसकी मारक क्षमता करीब दस वर्ग फुट होती है। इसके छर्रे करीब सौ वर्ग फुट तक पहुंचते हैं। इस मोर्टार शेल का वजन कम से कम चार से पांच किलो तक होता है।
81 एमएम का मोर्टार शेल जहां मिला है, उस स्थान का सेना और एसएसबी के लोगों ने निरीक्षण किया। संभावना जताई जा रही है कि ट्रेन से किसी ने इसे फेंका होगा या किसी के सामान से इसके वहां गिरने की संभावना है। सेना के लोगों ने बताया कि उक्त शेल का प्रयोग एक दशक पूर्व बंद हो गया है। अब इसका नया वर्जन आ गया है।
मोर्टार शेल और पाक सीमा पर चल रही गतिविधियों के बाद एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भारत-नेपाल सीमा के अलावा क्षेत्र की सघन चेकिंग के निर्देश दिए हैं। पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्रों द्वारा क्षेत्र ओर भारत-नेपाल सीमा पर पैनी नजर रखने के अलावा चेकिंग और सतर्कता बरती जा रही है। कार्यवाहक थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि भारत नेपाल सीमा के अलावा शारदा बैराज चौकी, ऊधम सिंह नगर जिले की जगबूड़़ा पुल और मझगांव से लगी सीमा पर भी निगरानी की जा रही है। उधर, एसएसबी की 57 वीं वाहनी की ए और इ कंपनियों के जवानों द्वारा भारत -नेपाल सीमा पर सघन पेट्रोलिंग के साथ चेकिंग की जा रही है।