छह दिन पहले यहां मिले मोर्टार शेल को सेना की बीडीएस टीम ने पूरी सुरक्षा के साथ निष्क्रिय कर दिया। शेल के निष्क्रिय होने के बाद पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां, खुफिया तंत्र के अलावा क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है। शेल कहां से आया यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।
लखनऊ से मंगलवार देर शाम यहां पहुंची बीडीएस (बम डिस्पोजल एस्कार्ट) टीम ने एक मार्च को मिले 81 एमएम मोर्टार शेल को क्षेत्र के पश्चिमी छोर पर स्थित बरसाती हुड्डीनदी तट पर करीब दस फुट गहरे गड्ढे में रेतों की भरी बोरियों से कवर कर निष्क्रिय किया। मेजर गौरव माजिल्या के नेतृत्व में 201 काउंटर एक्सप्लोसिव डिवाइस यूनिट लखनऊ सेंट्रल कमांड से आई बारह सदस्यीय टीम ने प्रात: 8.30 बजे मोर्टार शेल को डिफ्यूज करने की कार्रवाई शुरू की। शेल और उसके फ्यूज को निष्क्रिय करते वक्त जोरदार धमाके भी हुए।
इस मौके पर पुलिस ने क्षेत्र की पूरी घेराबंदी की थी। मोर्टार शेल को निष्क्रिय करने के बाद गड्ढे को रेत भरकर पाट दिया गया। सीओ नरेश चंद ने बताया कि 81 एमएम मोर्टार शेल बहुत अच्छी हालत में था। बताया कि महाराष्ट्र के कीर्की आर्डीनेस फैक्ट्री में तैयार मोर्टार शेल 1976 का निर्मित था। इस मौके पर थानाध्यक्ष जसवीर सिंह चौहान, सुरक्षा एजेंसियों, खुफिया विभागों के अलावा स्थानीय सेना छावनी के लोग भी मौजूद थे।