जमीनों से जुड़े वादों के निपटारे के लिए बने हैं राजस्व न्यायालय
कृषि भूमि से संबंधित नामांतरण अधिकारों की घोषणा, खेतों का बंटवारा, अवैध कब्जा हटाना आदि के समयबद्ध निस्तारण के लिए राजस्व न्यायालयों का गठन किया गया है। राजस्व न्यायालयों को सिविल न्यायालयों की भांति शक्तियां दी गई हैं। इसके बावजूद राजस्व न्यायालयों में छोटे-छोटे जमीन विवाद सालों तक लंबित चले आ रहे हैं।
1130 मुकदमें तीन साल से भी अधिक पुराने
राजस्व परिषद्, आयुक्त, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, सहायक कलेक्टर, तहससीलदार, नायब तहसीलदार के न्यायालय में 1130 मुकदमे तीन साल से भी अधिक पुराने हैं।
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रुद्रप्रयाग में सबसे कम और देहरादून में सबसे अधिक वाद लंबित
प्रदेश में कुल 51555 राजस्व वाद हैं। इसमें से 17232 वाद निस्तारित किए गए हैं। वर्तमान में 34323 वाद लंबित हैं। देहरादून में सबसे अधिक 15992 वाद लंबित हैं, जबकि रुद्रप्रयाग जिले में सबसे कम 52 वाद लंबित हैं।