साल 2018 तक उत्तराखंड का कर्ज 46 हजार करोड़ से ज्यादा हो जाएगा, अर्थ एवं संख्या निदेशालय की ओर से हाल ही में की गई आर्थिक समीक्षा में चिंतित करने वाला यह तथ्य सामने आया है।
गौरतलब है कि राज्य गठन के समय यह कर्ज केवल चार हजार करोड़ रुपए का था और उस समय का सवा चार सौ करोड़ का राजकोषीय घाटा भी 2017-18 में करीब छह हजार करोड़ हो जाएगा। प्रदेश में कर्ज के मर्ज पर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है, बावजूद इसके प्रदेश के राजकोषीय घाटे और कर्ज की रफ्तार पर फिलहाल कोई ब्रेक लगता नहीं दिख रहा है।
हाल यह है कि विधानसभा के चुनाव के तुंरत बाद के वर्ष में प्रदेश का कर्ज 46 हजार करोड़ रुपए से अधिक का होगा। इस तरह से हर प्रदेशवासी के हिस्से करीब 46 हजार रुपए का कर्ज होगा। यह तब है जबकि राज्य के गठन के समय प्रदेश पर मात्र चार हजार करोड़ रुपए का ही कर्ज था।
यही हाल राजकोषीय घाटे का है। वर्ष 2017-18 में राजकोषीय घाटा करीब 5794.49 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। राज्य गठन के समय यह घाटा मात्र 424.19 करोड़ रुपए था। राज्य गठन के बाद से ही राजकोषीय घाटे में भी लगातार इजाफा हो रहा है।
वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कर्ज और घाटे में इजाफा तो है पर इसके साथ ही प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) भी बढ़ रहा है। आर्थिक समीक्षा के मुताबिक जीडीपी और घाटे का अनुपात 2017-18 में 2.95 रहने का अनुमान है। राज्य गठन के बाद के शुरू के सालों में जीडीपी और घाटे का अनुपात करीब आठ प्रतिशत था।