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शनिवार को चंद्रग्रहण, इन बातों का रखें ध्यान

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शनिवार को चंद्रग्रहण लगेगा। इस समय समय मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
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ऐसे में ज्यादातर मंदिरों में हनुमान जयंती रविवार को मनाई जाएगी। वहीं ग्रहण का दोष तीन दिन बाद तक यानी मंगलवार तक रहेगा। दून में चंद्रग्रहण 38 मिनट तक लगेगा। 12 मिनट खग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। यानी इस समय चांद पूरी तरह ढक जाएगा।

ग्रहण का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। ग्रहण का स्पर्श शाम 3.45 बजे होगा, जो शाम 7.15 बजे तक रहेगा। दून में 6.37 बजे चंद्रग्रहण लगेगा। जबकि नौ घंटे पूर्व इसका सूतक शुरू हो जाएगा।
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पंडित भरत राम तिवारी के अनुसार इस दौरान मूर्तियों को न छूएं। पूजापाठ भी वर्जित रहेगा। उन्होंने इस दौरान भोजन नहीं करने की भी बात कही है। हालांकि गर्भवती महिलाएं दवा का सेवन कर सकती हैं।

चंद्रग्रहण का प्रभाव एक सप्ताह तक माना जाता है। यानी ग्रहण से तीन पहले और तीन दिन बाद तक ग्रहण का दोष रहता है। चंद्रग्रहण कन्या राशि और हस्त नक्षत्र पर लग रहा है। जिस नक्षत्र पर ग्रहण लगता है, उस नक्षत्र पर छह महीने तक शुभ कार्य नहीं होते हैं।
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हनुमान जी को चढ़ाया गया चोला

चंद्रग्रहण की वजह से देहरादून के कई मंदिरों में हनुमान जयंती शुक्रवार को एक दिन पूर्व ही मना ली गई। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजन करने श्रद्धालु उमड़ पड़े।

माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर टपकेश्वर में हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में सुंदरकांड का पाठ किया गया। हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही यज्ञ का आयोजन किया गया। आचार्य बिपिन जोशी ने बताया कि सर्वप्रथम हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का चोला चढ़ाया गया।

बताया कि शनिवार को चंद्रग्रहण के चलते एक दिन पहले ही हनुमान जयंती मना ली गई। इस मौके पर रामसेवक शर्मा, डॉ. मथुरा दत्त जोशी, मुकुल सती, पंडित कमल जोशी आदि उपस्थित रहे। पटेलनगर स्थित श्री आदर्श मंदिर में हनुमान जी को नया चोला अर्पण किया गया। अरविंद साईं एंड पार्टी के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।

उधर, नेहरूग्राम स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा की शुरुआत सुबह दस बजे हनुमान मंदिर से हुई। यहां से यात्रा रिंग रोड, जोगीवाला, रिस्पना पुल, नेहरू कालोनी, अंबीवाला गुरुद्वारा होते हुए वापस मंदिर पहुंच संपन्न हुई।

इस मौके पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने बजरंग बलि का आशीर्वाद लिया। यात्रा में शामिल श्रद्धालु हनुमान जी के भजन गाते हुए चल रहे थे। मंदिर पहुंच बजरंग बली की विशेष पूजा-अर्चना की गई। यात्रा में पंडित रमेश चंद्र खंडूरी, संजय उपाध्याय, राकेश कोटनाला, गीता, हिमांशु, गणेश, रोशनी आदि शामिल रहे।
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