राजधानी में मानसून की दस्तक होने ही वाली है, लेकिन जलभराव से निजात पाने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। एक दिन की बरसात में ही शहर की सड़कें जलमग्न हो जा रही हैं।
दरअसल, शहर के मुख्य क्षेत्रों के नाले ही भरे हुए हैं, तो कहीं कई महीनों से नालों की सफाई नहीं हुई है। सड़क किनारे लगे कूड़े कचरे के ढेर पर्यटकों का स्वागत करते हैं। ये बदहाली निगम के दावों की पोल खोल रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि सड़क किनारे लगे कूड़े कचरे के ढेर बरसात के बाद बुरी तरह सड़ांध मारते हैं, जिससे लोगों का सांस लेना तक दूभर हो जाता है। इसके कारण के दून में महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। निगम की ओर से लगाई गई डस्टबिन भरे पड़े रहते हैं। दो-चार दिनों में यहां से कचरा उठाया जाता है।
तब तक लोग सड़क पर कचरा डालने लगते हैं और देखते ही देखते कचरे का ढेर बन जाता है। कई बार बारिश के दौरान कचरा सड़क पर बिखर जाता है। इससे लोग गंदगी से निकलने को मजबूर होते हैं। कई महीनों से नालों की सफाई नहीं हो पाई है। कई स्थानों के नाले कचरे से पटे हुए हैं। जिनकी ओर निगम का ध्यान नहीं जा रहा है। अधिक बरसात होने पर जलभराव की समस्या होना निश्चित है। नालों की स्थिति इतनी बदहाल है कि एक बार की बारिश में नाले भर जाते हैं और सड़क पर पानी आ जाता है। इसके कारण पैदल चलने वाले को ज्यादा समस्या होती है।
निगम की ओर से मानसून की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 90 फीसदी नालों की सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। कूड़ा कचरा अभियान से लगातार स्वच्छता बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. अभिनास खन्ना, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, देहरादून