देहरादून। आईआरडीई ने पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशिकी एवं विद्युत प्रकाशिकी में असाधारण प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद रात को हमारे सभी फाइटिंग प्लेटफार्म को सक्षम करना और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर से पूरी सीमा और तट रेखाओं की निगरानी अभी चुनौती है। हालांकि जल्द ही रक्षा वैज्ञानिक इस दिशा में कामयाबी हासिल कर लेंगे।
यह बातें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने शनिवार को ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से आईआरडीई में आयोजित प्रकाशिकी एवं विद्युत प्रकाशिकी पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कहीं। डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि भारत ने प्रकाशिकी, ऑप्टो-इलेक्टॅानिक्स और फोटोनिक्स के महत्व को समझा है। वर्तमान में डीआरडीओ सहित कई अनुसंधान एवं विकास संस्थाएं इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य कर रही हैं। डीआरडीओ निगरानी, फायर नियंत्रण, लेजर एवं आईआर गाईडेंस, नेविगेशन कंप्यूटिंग, सुरक्षा अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित नेटवर्किंग के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करा रहा है।
सम्मेलन के मुख्य आयोजक निदेशक आईआरडीई उत्कृष्ट वैज्ञानिक बेंजनिन लयनल ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सामरिक अनुप्रयोगों के लिए सशस्त्र बलों के लिए निगरानी और इलेक्ट्रा ऑप्टिक डे ओर नाइट विजन इंस्ट्रमेंट के विकास पर जोर देना है। इस दौरान उन्होंने उच्च रिजोल्यूशन और हाईपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग के साथ लंबी दूरी की निगरानी, ऑप्टिक की आवश्यकता वाले यूएवी और उपग्रह के उपयोग के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। सम्मेलन को पूर्व निदेशक आईआरडीई डॉ. एसके गुप्ता और डॉ. एसएस नेगी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में कुल 500 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस दौरान अमिताभ घोष, सुधीर खरे सहित बड़ी संख्या में शोधकर्ता, डेवलपर्स, शिक्षाविद आदि मौजूद रहे।