उत्तराखंड के गन्ना किसानों को आने वाले दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। निजी चीनी मिलों के 127 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान के लिए प्रदेश सरकार कोई फार्मूला नहीं तलाश पाई है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से भी किया आग्रह
हालांकि मुख्यमंत्री इसके लिए रास्ता निकालने का आश्वासन दे रहे हैं। सोमवार को सदन में यह मुद्दा उठा तो मुख्यमंत्री हरीश रावत को कहना पड़ा कि इतनी बड़ी राशि अगर सरकार अपने संसाधनों से देगी तो बजट बिगड़ने का खतरा है। इस पर वित्त विभाग भी सहमत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने लगे हाथों विपक्ष से भी आग्रह किया कि केंद्र से 400 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज स्वीकृत कराने में प्रदेश सरकार की मदद करें। सदन में गन्ना बकाया भुगतान का मसला हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने उठाया। कौशिक ने कहा कि प्रदेश की चार निजी मिलों ने किसानों को बकाया गन्ना मूल्य नहीं दिया है।
गन्ना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की मौजूदगी के बावजूद जवाब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिया। नेता सदन ने कहा कि केंद्र से 400 करोड़ रुपए की विशेष सहायता की मांग की गई है। प्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा गन्ना किसान हैं। छह सार्वजनिक और सरकारी चीनी मिलों के बकाए भुगतान की व्यवस्था सरकार ने की है।
इसमें 47 करोड़ रुपए बकाया है जिसका इंतजाम किया जा रहा है। निजी चीनी मिलों के बकाये भुगतान के लिए सरकार हर तरह की सख्ती करेगी पर केंद्र से 400 करोड़ रुपये मिले तो बकाया भुगतान भी होगा और चीनी मिलों का आधुनिकीकरण भी किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बकाया भुगतान की समस्या इतने से नहीं सुलझेगी। चीनी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से कम हो रहा है। वहीं निजी चीनी मिलों और गन्ना किसानों के बीच करार होता है। सरकार इसमें पार्टी नहीं है। लिहाजा बकाया भुगतान कराना भी आसान नहीं है। सरकार इस मामले में कोई न कोई फार्मूला जल्द निकालने की कोशिश कर रही है।
जल्द घोषित होगा गन्ना मूल्य
उत्तर प्रदेश की ओर से गन्ना मूल्य घोषित होने के बाद भी प्रदेश में अभी तक गन्ना मूल्य तय नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार जल्द ही गन्ना मूल्य और निजी मिलों के पेराई सत्र की घोषणा करेगी।
काशीपुर का मामला उलझा
काशीपुर चीनी मिल बंद होने के दो साल बाद भी गन्ना किसानों का करीब 40 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हो पाया है। काशीपुर विधायक हरभजन सिंह चीमा ने सदन में सवाल उठाया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए लिक्वीडेटर नियुक्त किया गया है।