इसमें सभी प्रांतों व जिलों के करीब 1350 प्रतिनिधि भाग लेते हैं। पिछले वर्ष 9 से 11 मार्च तक नागपुर में हुई सभा में संघ प्रमुख का उत्तराखंड प्रवास तय हुआ था। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य संघ की गतिविधियों की समीक्षा करना और अलग-अलग क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ देश व समाज के वर्तमान हालत पर वार्तालाप करना है।
चार दिवसीय प्रवास के दौरान संघ प्रमुख तिलक रोड स्थित प्रदेश कार्यालय में रहेंगे। प्रत्येक दिन दो बैठकें होगी। सात फरवरी को दायित्ववान स्वयं सेवकों का परिवार सम्मेलन होगा। जिसमें भागवत उनके परिवार के सदस्यों के साथ अनौपचारिक वार्ता व रात्रि भोज करेंगे।
इस सम्मेलन के लिए स्वयं सेवकों से परिवार के प्रति सदस्य के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। इस प्रवास में प्रांतीय स्तर से लेकर निचले स्तर के कार्यकर्ता का मार्गदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर सह प्रांत प्रचार प्रमुख संजय कुमार, महानगर प्रचार प्रमुख हिमांशु अग्रवाल मौजूद रहे।
पांच फरवरी - पहले दिन संघ के शाखा कार्यवाह व मुख्य शिक्षकों के साथ बैठक व स्वयं सेवकों से मिलेंगे।
छह फरवरी - नगर इकाइयों की कार्यकारिणी, देहरादून, विकासनगर, पुरोला इकाईयों के दायित्ववान स्वयं सेवकों के साथ बैठक।
सात फरवरी - डिग्री व पीजी कालेज में छात्र हित में काम करने वाले दायित्वान विद्यार्थियों की बैठक व शाम को स्वयं सेवकों का परिवार सम्मेलन।
आठ फरवरी - संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद लोक संस्कृति कलाकार, गायकों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों व प्रबुद्ध नागरिकों व इंटर कालेजों के प्रधानाचार्यों से वार्तालाप।
कार्यक्रमों में स्वयं सेवकों के अलावा किसी की एंट्री नहीं
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रवास के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में स्वयं सेवकों के अलावा अन्य किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। संघ ने कार्यक्रम में राजनीतिक दलों को आमंत्रित नहीं किया गया है। सिर्फ संघ के स्वयं सेवक ही बैठकों में भाग लेंगे। प्रत्येक दिन के कार्यक्रमों की जानकारी मीडिया को विश्व संवाद केंद्र में प्रेसवार्ता के माध्यम से दी जाएगी।
लोकसभा चुनाव की दस्तक के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का उत्तराखंड प्रवास अहम माना जा रहा है। चार दिनों तक वह स्वयं सेवकों के साथ बैठकें कर अनुसांगिक संगठनों की ताकत का पता लगाएंगे।
वहीं, स्वयं सेवकों को संघटन की मजबूती का मंत्र देेंगे। प्रवास को लेकर संघ ने सभी तैयारी पूरी कर ली है, हालांकि संघ से जुडे़ लोगों का दावा है कि भागवत के कार्यक्रमों का भाजपा की राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।
भागवत के दौरे को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए उलटी गिनती शुरू हो गई है। संघ के राजनीतिक अनुसांगिक संगठन भाजपा की तैयारियां काफी आगे निकल गई हैं। एक दिन पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह देहरादून में त्रिशक्ति सम्मेलन में भाग लेकर लौटे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ऊधमसिंह नगर में कार्यक्रम तय हो गया है। इन स्थितियों के बीच संघ प्रमुख के प्रवास से भाजपा को नई ताकत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। यह सब जानते हैं कि चुनाव के दौरान संघ के स्वयंसेवकों की टीम भाजपा के लिए खुलकर प्रचार भले ही न करे, लेकिन माहौल बनाने का काम जरूर करते हैं। भागवत के उत्तराखंड प्रवास का महत्व एक और वजह से भी है।
दरअसल, भाजपा जिस हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है, उसके लिहाज से उत्तराखंड की धरती को काफी ‘उपजाऊ’ माना जाता है। चार धाम के साथ ही गंगा और कई अन्य कारक, जो कि हिंदुत्व के आधारभूत तत्व माने जाते हैं, उनका उत्तराखंड से अहम नाता है। हालांकि संघ के क्षेत्र कार्यवाह शशिकांत दीक्षित का कहना है कि संघ प्रमुख संगठनात्मक कार्यक्रम में आ रहे हैं। उनके कार्यक्रम को सियासी नजर से देखा जाना गलत है। बैठकों में किसी राजनीतिक व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया गया है।