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'कसक' दिल में लिए कांग्रेस को कोसते रहे मोदी

Sun, 15 Dec 2013 06:46 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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लौह पुरुष सरदार पटेल के नारों से अपनी बात शुरू कर नरेंद्र मोदी ने आपदा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने के साथ भ्रष्टाचार और कांग्रेस सरकारों पर चोट की। उन्होंने गुजरात में आए भूकंप को याद किया और उत्तराखंड के लोगों को झकझोरते हुए कहा कि आपके सपने मेरा संकल्प और आपकी जरूरत मेरी जिम्मेदारी होगी।
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भाषण के दौरान लगातार मिली तालियों के बीच मोदी ने टेरेरिज्म डिवाइड और टूरिज्म यूनाइट का मूल मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अहंकारी हो गई है, उसे सबक सिखाना है।

देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में रविवार को पार्टी की शंखनाद रैली में शिरकत करने आए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र भाई मोदी भीड़ देखकर गदगद थे।
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कसक दिल में है
कुछ मिनट नम्रता के साथ पेश आए और कहा कि देहरादून में रैली करने का मेरा मन नहीं था, छह महीने पहले ही दैवी आपदा के कहर का दृश्य मेरी आंखो में है। इतना कहते ही मोदी सीधे हमलावर हो गए और उन्होंने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार निष्ठुर हो गई, पीड़ितों का दर्द भी नहीं बांटा।

बोले, मैं आया था उस दुख की घड़ी में लेकिन कांग्रेस की राजनीतिक निष्ठुरता के चलते मुझे वापस लौटना पड़ा। कसक दिल में है, ठंड का मौसम शुरू हो गया और हजारों लोग आपदा से अब तक बेघर है।

गुजरात को फिर से खड़ा किया
मोदी ने भुज और कच्छ के भूकंप को याद कर कहा कि गुजरात मौत की चादर ओढ़कर सोया था। लेकिन जिसने मदद दी हमने उसे गले लगाया, उत्तराखंड ने भी दी और हमने पाकिस्तान की मदद भी ली। क्योंकि दुख की घड़ी में यदि राजनीति हो तो पीड़ितों का दर्द बढ़ता है। हमने गुजरात को फिर से खड़ा किया।

उत्तराखंड से गहरा रिश्ता
मोदी ने फिर लोगों की नब्ज पर हाथ रखा और कहा कि मेरा उत्तराखंड से गहरा रिश्ता है, प्रदेश का संगठन प्रभारी रहा हूं, जन्म से हिमालय से लगाव है।

इस राज्य ने मुझे बहुत कुछ दिया, मोदी ने जनता की तरफ देखा और कहा कि अब मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए ताकि उत्तराखंड का कुछ ऋण लौटा सकूं।

मोदी बोले,मित्रों दिल्ली हो या देहरादून जनता से कटे और मन से छंटे लोग राज कर रहे हैं। बाबा रामदेव को फंसाने के लिए कांग्रेस सरकार ने जितनी ऊर्जा लगाई उससे आधी में प्रदेश का विकास आगे बढ़ता।

पलायन क्यों हो रहा है?
अटल जी ने राज्य दिया, दस साल का विशेष पैकेज दिया लेकिन कांग्रेस केंद्र में आई तो पैकेज तीन साल कम कर दिया। राज्य को कुछ देने के बजाय लूटना शुरू किया।

उन्होंने अपने अनुभव बांटे और कहा कि मुझे पहाड़ के लोग कहते थे कि यहां का पानी और जवानी राज्य के काम नहीं आते। लेकिन इतना पानी होने के बाद भी देश अंधेरे क्यों है, लोगो की गरीबी क्यों बढ़ रही है और पलायन क्यों हो रहा है? क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती लोगों की गरीबी दूर हो।

ना ट्रेन ना सड़क
दिल्ली तक ट्रेनें चलाई लेकिन उत्तराखंड को कुछ नहीं दिया। धर्मस्व व पर्यटन केक्षेत्र में उत्तराखंड सवा सौ करोड़ रुपए के बिजनेस का इंतजार करता है लेकिन लोगों को उनके नसीब पर छोड़ दिया गया।

लोग तीर्थाटन व पर्यटन के लिए आना चाहते हैं लेकिन ना ट्रेन ना सड़क। तीस साल में मक्का ऐसा धार्मिक स्थाल बन गया जहां दुनिया में एक साथ सबसे ज्यादा लोग एकत्र होते हैं। तो उत्तराखंड भारत का मक्का क्यों नहीं बन सका।

आत्म निर्भर क्यों नहीं किया गया
मोदी ने कहा कि लक्ष्मण मूर्छित हुए तो उन्हें ठीक करने केलिए हिमालय से संजीवनी बूटी मंगाई गई। यहां जड़ी बूटी का भंडार है तो फिर परंपरागत ज्ञान बढ़ाकर, रिसर्च सेंटर खोलकर, औषधि बनाने की कला सिखाकर लोगों को आत्म निर्भर क्यों नहीं किया गया।

पहाड़ में महिला परिवारों का पालन पोषण करती है उनके स्किल डेवलपमेंट के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम क्यों नहीं है। ऐसे तमाम सवाल मोदी ने खुद ही जनता के सामने रखे और जवाब मांगा।

खंडूड़ी का लोकायुक्त भी दिलाया याद
मोदी ने कहा कि कल एक कांग्रेस नेता लोकपाल पर पत्रकार वार्ता कर रहे थे। भ्रष्टाचार को लेकर बड़े चिंतित थे लेकिन इस कांग्रेस नेता व केंद्र सरकार को यह तो बताना ही चाहिए कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार में बीसी खंडूड़ी ने तो लोकायुक्त बिल बनाया था उसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बावजूद क्यों लागू नहीं किया गया।

मीडिया पर भी प्रहार किया और कहा कि यदि हम ऐसा कर देते तो मीडिया हमे जीने नहीं देता और अब कोई तो इस कांग्रेस से पूछो।

श्रम कौशल के साथ खेती बाड़ी पर भी फोकस
गुजरात का एक संदर्भ सुनाते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे कार्मिकों की क्षमता बढ़ाकर फायदा होता है।

मैंने गुजरात में यह प्रयोग खेती बाड़ी के लिए किया। कार्मिकों का आउटपुट निकाला गया। यदि एक कर्मचारी एक साल का काम छह महीने में करता है तो शेष छह महीने का अवकाश दिया जाए वो भी पूरे वेतन के साथ।

अवकाश के छह महीनों में पूरा वेतन मिलेगा और उक्त कर्मचारी अपने घर जाकर खेती किसानी का काम करेगा, अपने मां बाप के पास रहेगा। इससे एग्रीकल्चर सेक्टर में वृद्धि होगी।

तीनों नए राज्यों की तुलना करने को कहा
तेरह साल पहले देश में उत्तराखंड, झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्यों का गठन हुआ। लेकिन अब इन तीनों की तुलना होनी चाहिए।

तीनों का अध्ययन किया भी गया, लोगो की समझदारी के चलते छत्तीसगढ़ का सबसे ज्यादा विकास हुआ। झारखंड और उत्तराखंड की जनता ने समझदारी से काम नहीं लिया।

सरकारें बदलीं, नेता बदले और नुकसान उठाया। मोदी ने कहा कि एक बार भाजपा पर भरोसा करो, सिर्फ एक बार। जनता ने तालियों के साथ मोदी की इस बात का स्वागत किया।
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