उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज प्रदान किया, जिससे आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस पैकेज से मजदूरों, किसानों और गांवों को मजबूती मिलेगी। इसमें एमएसएमई सेक्टर को भी बूस्ट करने के लिए बहुत से महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
इसका फायदा राज्य के एमएसएमई क्षेत्र को भी मिलेगा। मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आंवटन करने से गांवों में रोजगार के अवसर बड़ी संख्या में उपलब्ध होंगे। इससे विशेष तौर अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को काम मिलेगा।
कर्मचारियों को राहत देते हुए अब अगले तीन माह तक पीएफ में अंशदान का भुगतान सरकार करेगी, जिसपर 2500 करोड़ का खर्च आएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक व्यय को बढ़ाने से स्वास्थ्यगत ढांचा मजूबत होगा। हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में सुविधाएं बढेंगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर संक्रामक रोग अस्पताल और पब्लिक हेल्थ लैब की स्थापना से हेल्थ सिस्टम का गांवों तक विस्तार होगा।
राज्यों के लिए उधार की सीमा को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है। इससे राज्यों को वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में 14 फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की है। किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए व्यवस्था की गई है। लॉकडाउन के दौरान भी किसान काम करते रहें, इसके लिए केंद्र सरकार ने उनकी हर जरूरत का ध्यान रखा।
लॉकडाउन में पीएम किसान फंड में 18700 करोड़ और पीएम फसल बीमा के लाभार्थियों को 6400 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। पीएम मत्स्य संपदा योजना में 20 हजार करोड़ का प्रावधान है। कृषि का आधारभूत ढांचा बनाने के लिए 1 लाख करोड़ की योजना लाई गई है। 3 करोड़ छोटे व सीमांत किसानों को लाभ देने के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।