हिमालयी क्षेत्र की तलहटी वाले क्षेत्र शिवालिक में आधुनिक मानव 20 लाख साल पहले आया था।
इस दौरान आधुनिक मानव की सेहत बहुत अच्छी थी, हाथ-पैर की हड्डियां बहुत मजबूत और चौड़ी होती थीं, लेकिन हिमालय की ऊंचाई बढ़ने के साथ ही इस क्षेत्र की जलवायु बदलने लगी। डेढ़ लाख साल पहले जलवायु परिवर्तन ने हिमालय के नीचे शिवालिक क्षेत्र का मौसम ही बदल डाला। बहुत सी वनस्पतियां नष्ट हो गईं। यही वह दौर था, जब मानव की सेहत का क्षरण शुरू हो गया। मानव की फूड हैबिट बदल गई और अस्थियां पतली होने लगीं।
हिमालयी क्षेत्र में मिले जीवाश्मों की जांच से मानव उत्पत्ति और इसके विकास के इतिहास के कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आधुनिक मानव की प्राचीनतम नस्ल होमोसैपियंस के जीवाश्म हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्र के अलावा नर्मदा घाटी में भी मिले हैं। भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के विज्ञानियों को शिवालिक रेंज में मानव की कलाई की हड्डी, पसली का टुकड़ा आदि जीवाश्म मिले हैं।
इनकी जांच से ही उनकी उम्र का पता चला है। साथ ही यह पता लगा कि आधुनिक मानव के पुरखों का शरीर बहुत मांसल होता था और छाती बहुत चौड़ी। विज्ञानियों का अंदाजा है कि जब हिमालय की जलवायु में अधिक परिवर्तन आया तो वनस्पतियां और खानपान की चीजें नष्ट हुई और इसका प्रभाव मानव की सेहत पर पड़ा।
मानव विज्ञानियों का कहना है कि 20 लाख साल पहले जब आधुनिक मानव के पुरखे यहां रहते थे, उस वक्त लोअर और मिडिल शिवालिक का मौसम गर्म रहा है। यह जलवायु इनकी सेहत के माफिक थी, लेकिन जब हिमालय ऊपर उठना शुरू हुआ तो यहां ठंडक बढ़ गई। लोग पलायन कर गए या नष्ट हो गए।
आधुनिक मानव के पुरखों के जीवाश्म के साथ लोअर और मिडिल शिवालिक में कपि मानव के भी जीवाश्म मिले हैं, लेकिन अपर शिवालिक में न तो मानव का जीवाश्म मिला और न ही कपि मानव का। मानव विज्ञानियों को मानव से मिलने वाला निकटतम कपि मानव रामा मिलिकस का जीवाश्म 1985 में हिमाचल प्रदेश में मिला था। मानव जीवाश्म खोजने का यह सिलसिला अभी जारी है।
जब हिमालय ऊंचा होने लगा तो शिवालिक क्षेत्र की जलवायु बदली। यहां मौसम गर्म से ठंडा हो गया। इसी से शायद मानव की सेहत पर फर्क आया। सबसे बड़े कपि मानव जाइंगटोपिथिकस के अंतिम जीवाश्म चीन में मिले हैं। अपर शिवालिक में कपि मानव के संबंध में शोध अभी जारी है।
- डॉ. एआर सांख्यान, वरिष्ठ पुरा मानव विज्ञानी