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Uttarakhand: मानसून में सरकार मॉक ड्रिल से परखेगी बांधों की सुरक्षा, इमरजेंसी एक्शन प्लान साझा करने के निर्देश

Wed, 26 Jun 2024 02:37 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

सचिव आपदा प्रबंधन ने मानसून में बांध परियोजनाओं पर हुई बैठक में जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री धामी बैठक लेते - फोटो : सोशल मीडिया हैंडल
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विस्तार
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मानसून सीजन में सरकार मॉक ड्रिल से बांधों की सुरक्षा परखेगी। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में बांध परियोजनाओं के साथ बैठक में ये निर्देश दिए गए। सचिव डॉ. सिन्हा ने कहा कि जुलाई के पहले पखवाड़े में बांधों की तैयारी तथा सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।

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मॉक ड्रिल में यह देखा जाएगा कि सेंसर और सायरन सही काम कर रहे हैं या नहीं। साथ ही जो एसओपी बांध परियोजनाओं की ओर से बनाई गई हैं, आपातकालीन स्थिति में वह एसओपी धरातल में कितनी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि बांधों और बैराजों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होनी बहुत जरूरी है।

परियोजना के प्रतिनिधियों को सख्त हिदायत
उन्होंने कहा, सभी बांध ऑटोमेटिक सेंसर लगाएं ताकि एक निश्चित सीमा से बांध या बैराज का जल स्तर बढ़े तो सायरन खुद-ब-खुद बज जाए। उन्होंने सभी बांध परियोजनाओं के प्रतिनिधियों से कहा कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की तैनाती करें। उन्होंने सभी बांधों को अपनी-अपनी एसओपी तथा ऑपरेशनल मैनुअल यूएसडीएमए के साथ साझा करने को कहा।

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इसके साथ ही साइरन का शैडो कंट्रोल तथा सेंसर्स का एपीआई राज्य आपदा परिचालन केंद्र को उपलब्ध कराने को कहा। बैठक में सचिव डॉ. सिन्हा ने कहा कि नदी के किनारे डेंजर प्वाइंट चिन्हित किए जाने जरूरी हैं ताकि अचानक जलस्तर बढ़ने पर तनदी में जाने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरा न हो और लोग वहां जाने से बचें।

सचिव डॉ. सिन्हा ने जेपी ग्रुप की विष्णुप्रयाग बांध परियोजना के प्रतिनिधियों को सख्त हिदायत दी कि वे जल्द से जल्द अपनी एसओपी, इमरजेंसी एक्शन प्लान और शैडो कंट्रोल यूएसडीएमए के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के साथ साझा करें। 

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धारचूला में 360 डिग्री वाला साइरन लगाने के निर्देश

सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. सिन्हा ने धौलीगंगा बांध परियोजना के प्रतिनिधियों से धारचूला में 360 डिग्री का पांच किलोमीटर तक की रेंज वाला साइरन लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धारचूला मुख्य केंद्र है और यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। बता दें कि वर्तमान में बांध प्रबंधन द्वारा फोन पर नदी का जल स्तर बढ़ने की सूचना दी जाती है। जो सायरन धौलीगंगा बांध परियोजना ने लगाया है वह धारचूला से काफी दूर है और उसकी आवाज शहर तक नहीं पहुंचती।

टिहरी डैम की जल भंडारण क्षमता घटी

बैठक में टीएचडीसी के एजीएम एके सिंह ने बताया कि गाद जमा होने के कारण टिहरी बांध की जल भंडारण क्षमता 115 मिलियन घन मीटर तक घट गई है। पहले यह 2615 मिलियन घन मीटर थी और वर्तमान में यह 2500 मिलियन घन मीटर पर आ गई है।

यूपी सिंचाई विभाग को कारण बताओ नोटिस होगा जारी

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. सिन्हा ने उत्तरप्रदेश सिंचाई विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उत्तराखंड में यूपी सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन बांध और बैराजों में अर्ली वार्निंग सिस्टम नहीं लगाने पर सचिव आपदा प्रबंधन ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

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ग्लेशियरों का भी होगा सर्वे

सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. सिन्हा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया है, इसलिए इनका अध्ययन भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि ग्लेशियर झीलों के अध्ययन के लिए जल्द एक दल जा रहा है। ग्लेशियरों के अध्ययन के लिए भी एक दल जल्द भेजा जाएगा।

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यूएसडीएमए देगा सेटेलाइट फोन

यूजेवीएनएल के अधिशासी निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्होंने सेटेलाइट फोन भी खरीद लिए हैं। आपदा के समय यदि संचार व्यवस्था ठप हो जाए तो इनसे संवाद करने में बड़ी मदद मिलेगी। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि और सेटेलाइट फोन की जरूरत हो तो यूएसडीएमए से ले सकते हैं। उन्होंने बांधों के पास उपलब्ध सेटेलाइट फोन के नंबर भी यूएसडीएमए के कंट्रोल रूम से साझा करने को कहा।

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