बीएसएनएल के पोस्टपेड सिम लेकर दो युवकों ने आईएसडी कॉल कर सात लाख रुपए फूंक डाले। इसका खुलासा तब हुआ जब कनेक्शनों की आरसी कटी और असल आईडीधारक के नाम नोटिस आया। लाखों रुपए बकाया होने के बाद भी कनेक्शन नहीं काटने से एसडीओ भी मामले में नपते दिख रहे हैं।
सीजेएम के आदेश पर मल्लीताल कोतवाली में फर्जीवाड़े में शामिल दो युवकों और एसडीओ एक्सचेंज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस को दी तहरीर
पुलिस ने बताया कि रईस अहमद पुत्र शरीफ अहमद निवासी मेविला कंपाउंड नैनीताल की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि वह और मो. उस्मान मित्र हैं। मई 2012 में उनके जानने वाले सत्तार और दिनेश निवासी जहांगीरपुरी, नई दिल्ली उनके आवास में साथ रहे। इसी दौरान दोनों ने रईस और उसमान का पहचान पत्र चोरी कर लिया।
नोटिस मिलने के बाद मिली जानकारी
फिर रईस के नाम से तथा उस्मान के नाम से बीएसएनएल पोस्टपेड सिम लिए। इन नंबरों से आईएसडी नंबरों पर बातचीत हुई।
रईस के नाम वाले नंबर से 18 जनवरी 2013 तक 3,62,996 रुपए और उस्मान के नाम के नंबर से 18 फरवरी 2013 तक 3,63,749 रुपए का बिल अवशेष है। रईस का कहना है कि 4 जुलाई 2013 को तहसील से उन्हें नोटिस आया तो धोखाधड़ी की जानकारी मिली।
विभाग ने नहीं काटा कनेक्शन
उक्त पोस्ट पेड सिम में 1000 रुपए की लिमिट तय थी, लेकिन विभाग की ओर से कनेक्शन नहीं काटा गया। इस आधार पर रईस ने बीएसएनएल के एसडीओ एक्सचेंज विकास मेहरा को भी दोषी ठहराया है।
सीजेएम कोर्ट में रईस की ओर से वाद दायर होने के बाद अदालत के आदेश पर धारा 380 तथा 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच एसआई डीआर टम्टा को सौंपी गई है।
मानकों के तहत विभाग ने दिया सिम
एसडीओ विकास मेहरा का कहना है कि विभाग ने आवश्यक दस्तावेज तथा जांच के बाद ही सिम जारी किए हैं, जिसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया संबंधित नंबरों से एक ही आईडी पर अनेक बार बात हुई है।
पोस्ट पेड नंबरों में 1000 रुपए की लिमिट का प्रावधान नहीं है, अलबत्ता 1000 रुपए की बात के बाद उपभोक्ता को मैसेज जरूर आता है, लेकिन सेवाएं बंद नहीं की जाती। आईएसडी बातचीत का बिल डेढ़ माह बाद आता है, इसी कारण यह धनराशि इतनी अधिक पहुंच गई।