यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के बचाव और सुरक्षा के लिए अब उत्तराखंड सरकार स्मार्ट तकनीक का सहारा लेगी।
योजना है कि रजिस्ट्रेशन के दौरान यात्रियों को एक खास तरह का मोबाइल एप्स उपलब्ध कराया जाए। इससे यात्री खतरे की सूचना प्रशासन को दे सकेंगे।
इस ‘एप्स’ की मदद से जरूरी सूचना प्रशासन को देने के लिए यात्रियों को सिर्फ की पैड का एक बटन दबाना होगा। प्रदेश सरकार इस ‘एप्स’ के लिए दो-तीन कंपनियों से बात भी कर रही है।
एक कंपनी प्रेजेंटेशन भी दे चुकी है। यह खुलासा मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक एजेंसी से बातचीत के दौरान किया।
भीमबली और गुप्तकाशी में होगा मुख्यालय
बताया कि केदारनाथ यात्रियों को दी जाने वाली इस सुविधा के लिए प्रदेश सरकार चार मई से पहले-पहले भीमबली और गुप्तकाशी में मुख्यालय स्थापित करेगी। उल्लेखनीय है कि पांच मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोशिश मौसम बदलाव की पूर्व चेतावनी के लिए दो विशेष उपग्रहों की सेवाएं हासिल करने की भी है। बीती 16-17 जून को आई आपदा में पूर्व चेतावनी के संबंध में विवाद खड़ा हुआ था।
प्रदेश सरकार का कहना था कि आईएमडी (भारत मौसम विज्ञान विभाग) से मिली पूर्व चेतावनी इस तरह की नहीं थी, जिससे अहसास होता कि इतनी बड़ी आपदा कहर बरपाने वाली है।
उपग्रहों की सेवाएं पहले ही मिल गई होती तो...
मुख्यमंत्री के मुताबिक अगर इस तरह के उपग्रहों की सेवाएं पहले ही मिल गई होती तो प्रदेश में जून 2013 की आपदा में हताहत होने वालों की संख्या कम होती।
रावत के मुताबिक प्रदेश में बीएसएनएल का नेटवर्क अपग्रेड, मजबूत किया जा रहा है। इस काम के लिए धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित यात्रा प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता है।
इस बार की चारधाम यात्रा में प्रदेश सरकार अनिवार्य रूप से तीर्थयात्रियों का पंजीकरण करने जा रही है। बीती 16-17 मई 2013 की आपदा को देखते हुए इस बार यात्रियों की संख्या को नियंत्रित करने का मन भी बनाया गया है।
सोनप्रयाग पर रुक जाएगा वाहनों का सफर
इस बार केदारनाथ यात्रा पर आने वाले वाहनों को सोनप्रयाग से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक प्रशासन की तरफ से शटल सेवा (अनुबंधित टैक्सी) चलाई जाएगी। केदारनाथ हाईवे के क्षतिग्रस्त होने और पार्किंग स्थल नहीं होने की वजह से प्रशासन ने यह फैसला किया है।
गौरीकुंड तक जाते थे वाहन
मालूम हो कि पहले गौरीकुंड बस अड्डा, कार पार्किंग, बस पार्किंग, सोनप्रयाग पार्किंग और सीतापुर पार्किंग में सैकड़ों वाहन पार्क होते थे।
इसके अलावा वाहनों का दबाव बढ़ने पर गौरीकुंड से सीतापुर तक सड़क किनारे भी वाहन खड़े किए जाते थे। पिछले वर्ष जल प्रलय के दौरान हाईवे क्षतिग्र्रस्त होने के साथ पार्किंग स्थल बह गए।
नहीं खुला अभी हाईवे
बीआरओ अभी तक गौरीकुंड बाजार तक हाईवे को खोल नहीं पाया है। जहां सड़क खुली भी है, वह बडे़ वाहनों के जाने लायक नहीं है। ऐसे में यात्रा के दौरान सभी वाहनों के जाने से जाम की समस्या खड़ी हो सकती है।
बाहरी क्षेत्रों के चालकों के लिए यहां वाहन चला पाना भी मुश्किल हो जाएगा। यदि कोई वाहन सोनप्रयाग से आगे ले आए, तो फिर इसकी पार्किंग की दिक्कत हो जाएगी।
इसको देखते हुए प्रशासन निजी और यात्रा वाहनों को सोनप्रयाग में रोकने का योजना बना रहा है।
सोनप्रयाग, त्रियुगीनारायण मार्ग और सीतापुर में अस्थायी पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। बाहर से आने वाले वाहन सोनप्रयाग में रोक दिए जाएंगे। यहां से शटल सर्विस (अनुबंधित टैक्सी) चलेगी। इनका किराया निर्धारित किया जाएगा। सवारी उतारने के बाद बाहर से आने वाले वाहन इन पार्किंग स्थलों में खडे़ होंगे।
- डा. राघव लंगर, डीएम