हरिद्वार के ऑटो संचालकों को एक साल तरसाने के बाद अचानक परमिट जारी करने का फैसला यूं ही नहीं ले लिया गया।
सूत्रों की मानें तो 1200 ऑटो के परमिट में विभागीय अफसर बड़े खेल की तैयारी में थे। बिना ‘चढ़ावा’ परमिट जारी नहीं होने थे। इस बाबत एक अफसर ने आटो चालकों से ‘सेटिंग’ भी कर ली थी। लेकिन ऐन वक्त पर विधानसभा में हरिद्वार विधायक मदन कौशिक की गुगली ने खेल पलट दिया।
आरोपों के बीच मुख्यमंत्री ने दबाव बनाया तो आनन-फानन में अफसरों ने परमिट जारी कर दिए। सूत्रों की मानें तो आटो के परमिट तो जारी होने ही थे, लेकिन अधिकारी जानबूझकर इस मामले को लटकाए हुए थे। कोशिश वसूली की चल रही थी।
यह भी बताया जा रहा है कि एक अधिकारी ने आटो संचालकों से डील भी कर ली थी। बैंक लोन से परेशान आटो संचालक परमिट के लिए बीस से तीस हजार देने के लिए तैयार भी हो गए थे। इस लिहाज से 12 से 15 लाख तक कलेक्शन होने वाला था।
इस बीच बजट सत्र में हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने विधानसभा में मजबूती से यह मसला उठाया। पूरा विपक्ष उनके साथ जुट गया और आखिर मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा, क्योंकि परिवहन विभाग का जिम्मा वह खुद संभाल रहे हैं।
अब परमिट जारी होने से अफसर मायूस हैं। दूसरी ओर, भ्रष्टाचारमुक्त परमिट मिलने से आटो संचालकों को दोहरी खुशी है। एक तो उनका रोजगार शुरू होगा, दूसरा परमिट बिना सुविधा शुल्क दिए मिलेगा।