राजनीतिक विवाद का रूप ले चुके जिस स्लाटर हाउस को उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने बजट जारी किया, उसी सरकार के विधायक सरकार के फैसले के विरोध में आकर खड़े हो गए। इससे पहले वधशाला की अनुमति पर कांग्रेस सरकार को कोसा जा रहा था, लेकिन हकीकत यह है कि निर्माण प्रस्ताव से लेकर बजट तक भाजपा शासन में जारी हुआ है। ऐसे में अपनी बात से पीछे हटने की जगह भाजपा विधायकों ने अधिकारियों पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। उधर, कांग्रेस और बसपा को भी लगे हाथ मुद्दा मिल गया है। दोनों ही पार्टियां भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही।
बजट जारी कर धर्मनगरी का किया अपमान : स्वामी
मंगलौर में स्लाटर हाउस निर्माण पर मचे सियासी बवाल के बीच भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने एक बार फिर अपनी सरकार को घेरा है। यतीश्वरानंद ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने स्लाटर हाउस की अनुमति और बजट जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन करेंगे। स्वामी का कहना है कि स्लाटर हाउस की अनुमति देने वालों को धर्मनगरी हरिद्वार के धार्मिक महत्व और इतिहास की जानकारी के बाद निर्णय लेने चाहिए था। पवित्र धर्मनगरी और गंगा के किनारे पर कोई भी नहीं चाहता की यहां पर स्लाटर हाउस चले। ऐसे में बजट जारी कर उन्होंने क्षेत्र का अपमान किया है।
कांग्रेस ने की शुरुआत, भाजपा ने दिया अंजाम
मंगलौर में जिस स्लाटर हाउस के निर्माण को लेकर राजनीतिक फिजाओं मे अचानक गरमाहट आ गई है। दरअसल उस स्लाटर हाउस का प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नगर निगम मंगलौर की ओर से पारित किया गया था। इसके बाद भाजपा की सराकर ने ही कांग्रेस सरकार के इस रुके हुए कार्य को अंजाम तक पहुंचाया।
मंगलौर में स्लाटर हाउस निर्मित्त किए जाने की शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। 2014 में इसके लिए नगर पालिका मंगलौर में प्रस्ताव लाकर इसे पारित कराया गया था। जिसके बाद 2016 में कांग्रेस के समय में ही इसे मंजूरी भी मिल गई। लेकिन इसके बाद भाजपा सरकार ने इसे आगे बढ़ाया और बजट भी जारी कर दिया। नगर पालिका मंगलौर ईओ अजहर अली ने बताया कि 2014 में स्लाटर हाउस का प्रस्ताव नगर पालिका में पारित हुआ था। दो साल बाद इसे मंजूरी भी मिल गई थी। ऐसे में साफ हो रहा है कि भाजपा ने कांग्रेस सरकार के रुके हुए कार्य को ही आगे बढ़ाया है।