बीते पांच वर्षों के कामकाज के स्पेशल ऑडिट के आदेश को लेकर बृहस्पतिवार को उपाध्यक्ष (वीसी) आशीष श्रीवास्तव ने खुद को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से हटाने के लिए आवास सचिव को पत्र लिख दिया।
उनका तर्क है कि ऑडिट में उनका कार्यकाल भी शामिल है, लिहाजा निष्पक्षता की दृष्टि उनका एमडीडीए में बना रहना ठीक नहीं है। वीसी की इस चिट्ठी से शासन से लेकर एमडीडीए तक में खलबली मची है। इधर, खुद को घेरे जाने की खबरों पर पूर्व वीसी आर. मीनाक्षी सुंदरम भी तल्ख नजर आए, उन्होंने सख्त मगर सधे लहजे में अमर उजाला के सवाल के जवाब में कहा कि कैसा भी स्पेशल ऑडिट करा लें, न केवल एमडीडीए, बल्कि मैं जिन भी विभागों में रहा हूं, उनमें अपने एक-एक हस्ताक्षर का जिम्मेदार हूं। स्पेशल ऑडिट में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
छह अगस्त को आवास सचिव ने बीते पांच सालों में एमडीडीए की ओर से कराए गए सभी कामों के अलावा वित्तीय लेनदेन का स्पेशल ऑडिट करने का आदेश जारी किया है। इन पांच वर्षों में डॉ. आशीष श्रीवास्तव, विनय शंकर पांडेय, वी. षणमुगम के अलावा आर. मीनाक्षी सुंदरम बतौर उपाध्यक्ष तैनात रहे हैं। इसमें मौजूदा उपाध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव का कार्यकाल लगभग नौ महीने का है तो सबसे अधिक आर. मीनाक्षी सुंदर तीन वर्षों से भी ज्यादा वक्त तक उपाध्यक्ष रहे हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने एमडीडीए के स्पेशल ऑडिट की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। यह खबर आम होते ही, ब्यूरोक्रेसी में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई।
एनच-74 घोटाले में आईएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव के जांच के घेरे में आने से परेशान ब्यूरोक्रेट्स इस नए घटनाक्रम से सकते में आ गए। जिस तरह से नगर विकासमंत्री मदन कौशिक द्वारा एमडीडीए में दस वर्ष के स्पेशल ऑडिट के प्रस्ताव को खारिज करके पांच वर्ष के कार्यकाल को स्पेशल ऑडिट को चुना गया, उसको लेकर एक और आईएएस मीनाक्षी सुंदरम के संकट में घिरने का संदेश गया। इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म ही था कि मौजूदा उपाध्यक्ष डॉ.आशीष श्रीवास्तव का खुद को एमडीडीए से हटाने के अनुरोध का पत्र सामने आ गया। जिसमें उन्होंने स्पेशल ऑडिट में अपने नौ महीने के कार्यकाल की बात कहते हुए खुद को इस पद से हटाने की बात कही है। यह पत्र आवास विभाग के सचिव डॉ. नीतेश झा को बीती सात अगस्त को लिखा गया है।
सिफारिश की दो साल की आदेश हुआ पांच साल का
सूत्रों की मानें तो एमडीडीए के वीसी आशीष श्रीवास्तव ने कुछ समय पूर्व शासन को पत्र लिखकर वर्ष 2016-17 और 2017-18 का सामान्य ऑडिट कराने की बात कही थी। मगर शासन ने अप्रत्याशित तरीके से पांच सालों का स्पेशल ऑडिट कराने का आदेश जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि वर्ष 2015-16 तक का ऑडिट पहले ही हो चुका है।