करीब नौ महीने बाद जून 2024 में उनका नाम हटा दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में डॉ. मानसी को एक पत्र मिला जिसमें पता चला कि हिमांशु शेखर ने आईआईएफएल कंपनी से 27 जनवरी 2024 को उनके नाम से 15.82 लाख रुपये का बिजनेस लोन लिया है। डॉ. मानसी का कहना है कि इसके लिए उन्हें कोई न तो जानकारी दी गई और न ही किसी अधिकारी ने उनसे संपर्क किया।
किसी भी प्रक्रिया में उनसे कोई ओटीपी आदि भी नहीं लिया गया। डॉ. मानसी का आरोप यह भी है कि हिमांशु शेखर और उसकी पत्नी ने 17 मार्च 2023 को उनके पिता डॉ. विपिन वैश्य से भी फार्मा कंपनी में निवेश के नाम पर 40 लाख रुपये की मोटी रकम ली थी। यह आज तक उन्हें वापस नहीं की गई। एसएचओ ने बताया कि दंपती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।