गले में रेडियो कॉलर लगाए गए
जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व जितने भी बाघ-बाघिन लाए गए हैं, उन सभी के गले में रेडियो कॉलर लगाए गए हैं, ताकि गतिविधियों की मॉनीटरिंग की जा सके, लेकिन एक बाघ ने तो अपना रेडियो कॉलर बाड़े में निकाले जाने के बाद ही तोड़ दिया था, जबकि बाघिन का रेडियो कालर सुरक्षित था। टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बेहद कम संख्या में बाघों के चलते संख्या बढ़ नहीं पा रही थी।
टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों का कुनबा बढ़ाया जा सके, इसके लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की पहल पर जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व से बाघ और बाघिन को ट्रांसलोकेट किया गया था। अब जबकि टाइगर रिजर्व से एक बाघिन की लोकेशन पिछले 21 दिनों से नहीं मिल पा रही, तो टाइगर रिजर्व के अफसरों, वनकर्मियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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राजाजी टाइगर रिजर्व से लापता बाघिन का पता लगाया जा सके, इसके लिए टाइगर रिजर्व व वन विभाग के अधिकारियों की अगुवाई में विशेष सर्च अभियान चलाया जा रहा है। बाघिन के राजाजी टाइगर रिजर्व से निकलकर यूपी की सीमा में दाखिल होने की संभावनाओं के मद्देनजर यूपी वन विभाग से मदद मांगी गई है। बाघिन की खोजबीन को लेकर हर संभव कदम उठाए गए हैं। उम्मीद है कि बाघिन का जल्द पता लगा लिया जाएगा।
- डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक