एक जगह गार्ड के भरोसे पड़ी फ्लाईओवर निर्माण सामग्री तो दूसरी जगह काम करते गिनती के मजदूर। देहरादून के बल्लूपुर और बल्लीवाला चौराहे पर बन रहे फ्लाईओवरों की निर्माण का यह हाल देख नहीं लगता कि इनका काम जून तो क्या दिसंबर तक भी पूरा हो पाएगा।
सीएम, डीएम और आला अफसरों के निर्देश के बावजूद काम की सुस्त रफ्तार मुसीबत बन गई है। कार्यदायी संस्था के बेपरवाह अफसरों को न सरकार का डर है, न अफसरशाही का खौफ।
हरिद्वार-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर 28 करोड़ रुपये से बन रहे 798 मीटर लंबे बल्लूपुर फ्लाईओवर को तैयार करने की समय सीमा जून 2015 है, लेकिन यहां काम की स्थिति देख अंदाजा हो जाता है कि यह दिसंबर तक भी पूरा नहीं हो सकता।
चौराहे पर महज 4 पिलर खड़े हैं। सितंबर 2013 से अब तक फ्लाईओवर का आधा काम भी पूरा नहीं किया गया है, जबकि फ्लाईओवर की पहली डेडलाइन अक्तूबर 2014 को बीते छह माह हो चुके हैं। सुस्ती पर भड़के डीएम के एफआईआर दर्ज कराने की धमकी के बाद काम बढ़ा लेकिन रफ्तार इतनी सुस्त है कि कछुआ भी शरमा जाए।
इसी फ्लाईओवर से करीब एक किमी दूर 22.28 करोड़ रुपये से बन रहे 770 मीटर बल्लीवाला फ्लाईओवर का काम शिलान्यास के करीब डेढ़ साल बाद शुरू हुआ। चौराहे पर भूमि हस्तांतरण का मसला अटकने से काम रुक गया। जमीन की पैमाइश के बाद अब काम तेज होने की उम्मीद है। हालांकि मुआवजे की स्थिति साफ न होने से असमंजस बना हुआ है।
फ्लाईओवर की चौड़ाई पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। तमाम कारण जून 2015 में फ्लाईओवर का निर्माण पूरा होना संभव नहीं है। इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड (ईपीआईएल) के डीजीएम आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक समय सीमा जून तक है।
वक्त रहते काम पूरा करने की कोशिश है। ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए मजदूर आदि बढ़ाने के निर्देश दिए जाएंगे।
हैलो-हैलो के साथ एटीएम भी बंद
आईएसबीटी चौराहे पर अंडर ग्राउंड बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने से लोगों की हैलो-हैलो बंद हो गई है। बीएसएनएल के 380 लैंड लाइन उपभोक्ता परेशानी झेल रहे हैं। मरम्मत के चलते एटीएम भी नहीं चल रहे। धूल और जाम ने शहरवासियों परेशान कर रखा है। हालात यह हैं कि लोग इधर से आने-जाने से बचने लगे हैं।
बुधवार को चौराहे पर चल रहे कार्य के दौरान मौजूद एसडीओ प्रताप सिंह भंडारी ने बताया कि विद्युत लाइन के क्षतिग्रस्त होने से सभी सेवाएं ठप पड़ी हैं। कोशिश कि जा रही है कि जल्द-से-जल्द काम पूरा हो सके।
उनकी मानें तो बीएसएनएल को चार दिन में ही लाखों का नुकसान हो चुका है। बीएसएनएल कर्मी सुरेंद्र प्रसाद के मुताबिक स्टेट बैंक, बैंक आफ इंडिया, नैनीताल बैंक, केनरा बैंक के एटीएम संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
उधर, शिमला बाईपास, प्रीती एन्क्लेव, राजकीय पालिटेक्निक पित्थूवाला, प्रकाश लोक आदि क्षेत्रों के लोग भी समस्या से दो-चार हैं। चौक पर दिन भर काम चलने की वजह से लोगों को जाम का सामना करना पड़ा रहा है। धूल की वजह से सांस के मरीजों को भी भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
शास्त्री नगर आएं तो संभलकर
शास्त्री नगर आएं तो बहुत संभलकर.... भले ही ऐसा कोई चेतावनी बोर्ड यहां नहीं लगा है, लेकिन आप इसे चेतावनी ही समझें। जरा सी कोताही बरती तो आपको इसका खामियाजा अपनी जान देकर भी चुकाना पड़ सकता है।
दरअसल, हम आपको आगाह कर रहे हैं शास्त्री नगर में इंद्रानगर पुलिस चौकी के सामने खुले एक नाले के लिए। कई साल से खुला नाला अब तक कइयों को चोटिल कर चुका है। इसके शिकार लोगों की मानें तो इसे जल्द ढका न गया तो किसी की जान भी जा सकती है।
क्षेत्रवासियों की मानें तो कई साल से खुले इस खतरनाक नाले की हकीकत से कई बार विधायक हरबंस कपूर को रूबरू कराया गया, लेकिन कुछ हुआ नहीं। बैंकिंग सेक्टर में कार्यरत पंडितवाड़ी निवासी शैलेंद्र कुमार अपने साथ हुए हादसे का जिक्र करते हुए कहते हैं कि रात के अंधेरे में उनकी गाड़ी खुले नाले में गिरते-गिरते बची। कहा कि उस रात मैंने मौत को करीब से देखा।
एक बार लगा कि अब तो जान गई, पर शुक्र है भगवान का कि बच गया। वहीं, क्षेत्रीय निवासी 57 वर्षीय लाडो रानी ने बताया कि कई बार लोग नाले में गिर चुके हैं। बीते पांच-छह दिन में ही आठ लोगों के साथ दुर्घटना हो चुकी है।
बताया कि इंद्रानगर, अनुराग और शास्त्री नगर का पानी इसी नाले में आता है। बरसात में यहां पानी भरने से पानी की निकासी की दिक्कत होती है। नाला काफी बड़ा और चौड़ा होने से कई घरों से सटा हुआ है।
क्षेत्रवासियों में इस नाले को लेकर दहशत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घरों में छोटे बच्चे होने के कारण कई लोगों ने गेट के बाहर कई तरह के जुगाड़ किए हुए हैं, ताकि बच्चे नाले में न गिरें।
मिथलेश, शशि, प्रेम सिंह रावत, रण सिंह, बचनी सिंह रावत आदि क्षेत्रवासियों ने बताया कि रात के समय नाले से अधिक हादसे होते हैं। वर्षों से नाला खुला है। कई बार इसका हल निकालने के लिए गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा।
नाले को ढका नहीं जा सकता। इससे बाढ़ आने की आशंका है। बारिश में नाले के ऊपर पानी चलता है। यह हो सकता है कि नाले के किनारे-किनारे दो फुट की दीवार बना दी जाए। इंजीनियरों से बात कर रहा हूं। जैसे-जैसे बजट मिलता जाएगा काम होता रहेगा। अगर कोई और सुझाव देना चाहता है तो स्वागत है।
- हरबंस कपूर, विधायक कैंट