जब वह पहली बार गर्भवती हुई तो विनोद ने गर्भपात करा दिया। दूसरी बार में उससे बेटी पैदा हुई। 10 दिसंबर 2016 को पुलिस ने पॉक्सो न्यायाधीश विजयलक्ष्मी विहान की अदालत में विनोद के साथ ही उसके पिता सूरजपाल और मां राधा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता विकास गुप्ता और वतन जोशी ने छह गवाह पेश कर उनके बयान कराए। इसी बीच विनोद ने नाबालिग से जन्मी बेटी उसकी न होने का दावा कर कोर्ट से उसका डीएनए टेस्ट कराने की मांग की।
कोर्ट के आदेश पर कराए गए डीएनए टेस्ट में बच्ची विनोद की होने की पुष्टि हुई। शासकीय अधिवक्ताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और डीएनए जांच रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए पॉक्सो न्यायाधीश विजयलक्ष्मी विहान की अदालत ने विनोद को 10 वर्ष के कठोर कारावास आौर 90 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा, कोर्ट के आदेश पर आरोपी विनोद के पिता सूरजपाल और मां राधा को भी तीन-तीन वर्ष के कारावास के साथ पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भुगतना होगा।