दरअसल, केंद्र सरकार छावनी अधिनियम-2006 में संशोधन करने पर विचार कर रहा है। इसमें कैंट बोर्ड उपाध्यक्षों का सीधे चुनाव और निर्वाचित सदस्यों को अधिकार देने की बात हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र इस संशोधन को लागू कर अगले चुनाव के पक्ष में हैं।
वर्ष 2003 में भी कैंट बोर्डों को कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है। उस समय बोर्डों का कार्य 2003 में खत्म हो गया था, लेकिन उसके बाद रक्षा मंत्रालय ने कार्यकाल छह-छह महीने के लिए दो बार बढ़ाया। वर्ष 2004 तक तक बोर्ड का कार्यकाल चला। इसके बाद छावनी अधिनियम 2006 को लागू कर दो साल तक कैंट बोर्डों को भंग कर 2008 में नए चुनाव कराए गए।