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मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, पेंच अभी बाकी

Tue, 05 Aug 2014 02:34 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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स्टाफिंग पैटर्न वापसी के आदेश के बाद मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया। दिन भर चले हाई वोल्टेज ड्रामा के दौरान कर्मचारियों की आपस में बहस भी हुई।
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दोपहर तक अंदेशा जाहिर किया जा रहा था कि अगर राजस्व विभाग के दूसरे घटकों ने हड़ताल का समर्थन किया तो स्थिति बिगड़ सकती है।

सोमवार को बुलाई जनरल हाउस की बैठक में कर्मचारियों में मतभेद उभर आए। आखिर में हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया गया।

स्टाफिंग पैटर्न के विरोध में हड़ताल
लेकिन शाम को डीएसओ कार्यालय में राजस्व कर्मचारी महासंघ की बैठक में मिनिस्ट्रीयल कार्मिक मुद्दा लेकर पहुंचे तो प्रशासन को लगा कि हड़ताल का दूसरे संगठन समर्थन न कर दें।

लेखपाल और दूसरे घटकों के हड़ताल पर जाने के अंदेशे से डीएम ने स्टाफिंग पैटर्न वापस ले लिया। इसकी सूचना मिलते ही कर्मचारियों ने बैठक में अपना मुद्दा नहीं रखा। संघ के प्रांतीय जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने कहा कि वे स्टाफिंग पैटर्न के विरोध में हड़ताल पर थे। डीएम ने आदेश वापस ले लिया तो हड़ताल समाप्त हो गई।
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लेकिन कई पेंच अभी बाकी
जिस तबादला आदेश से मिनिस्ट्रीयल कार्मिकों के आंदोलन का मामला गरमाया था वह पेंच फंसा हुआ है। डीएम ने स्टाफिंग पैटर्न वापस लेने की घोषणा की है, तबादले निरस्त होने की नहीं। लेकिन कर्मचारी नेता कह रहे हैं कि स्टाफिंग पैटर्न के साथ तबादले का आदेश निरस्त हो गया है।

उत्तरांचल मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार का कहना है कि तबादला आदेश स्टाफिंग पैटर्न से ही संबंधित है। स्टाफिंग पैटर्न वापस होते ही तबादला आदेश निरस्त हो जाएगा।

तबादला आदेश में नए पदनाम कर दिए गए थे। डीएम का कहना है कि कर्मचारियों को जो नए पटल दिए गए हैं, मंगलवार से वे वहीं पर काम करेंगे। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि आंदोलन में कन्फ्यूजन रहा है। जिस स्टाफिंग पैटर्न का विरोध हो रहा था, वह लागू नहीं हुआ है। कार्मिकों में नाराजगी तबादले से थी। इस संबंध में कोई बात ही नहीं हुई।

पेशकार हड़ताल पर, डीएम बैठे कोर्ट में
कलेक्ट्रेट में पहली बार बिना पेशकार के डीएम ने कोर्ट ली और 67 मामले देखे। इस दौरान तीन मामलों पर बहस हुई और तीन मामलों का निस्तारण किया गया। डीएम ने कोर्ट में 37 मामले राजस्व और 27 मामले फौजदारी के देखे। इस दौरान अधिवक्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई कि कलेक्ट्रेट में फाइलें दबी रहती हैं। इससे दूसरे कोर्ट में वादों के निस्तारण में दिक्कत आती है। डीएम तीन घंटे तक कोर्ट में बैठे। इस दौरान हड़ताल पर बैठे पेशकार उलझन में रहे।
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