उत्तराखंड प्रदेश के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने किसी मामले में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
11 को फैसला सुनाएगी अदालत
जिला जज की अदालत में मंत्री की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कोर्ट समन की तामील न होने के कारण उन्हें ऐसी जानकारी नहीं है। हालांकि, याचिका में कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। अदालत 11 को फैसला सुनाएगी।
सीजेएम कोर्ट ने कुछ दिन पूर्व शिक्षा मंत्री और कुछ अन्य के खिलाफ वारंट जारी किया था। सोमवार को मंत्री के साथ आरोपी बनाए गए मुकेश रतूड़ी जिला जज राम सिंह की कोर्ट में पहुंचे और मंत्री की ओर से याचिका दायर की।
याचिका में मंत्री ने कहा कि अपर न्यायालय ने आदेश पारित करते वक्त इस तथ्य को नजरअंदाज किया कि प्रशासन ने फौजदारी वाद वापस लेने की संस्तुति की है। शासन ने भी 19 अक्तूबर 2013 को वाद वापसी का आदेश दिया था।
मंत्री ने याचिका में कहा है कि निचली अदालत की पत्रावली को तलब कर आदेश निरस्त किया जाए और वाद वापस लिया जाए। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने कहा कि शिक्षा मंत्री लंबे समय से कोर्ट में पेश नहीं हुए।
ऐसी स्थिति में निचली अदालत का उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए जाने का आदेश ठीक है।
यह है मामला
प्रकरण आत्महत्या के प्रयास का है। शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और कमल रतूड़ी ने वर्ष 2000 में बेरोजगारों की मांगों पर शहीदस्थल के पास खुद पर मिट्टी तेल छिड़क आत्मदाह का प्रयास किया था। तब कमल रतूड़ी बेरोजगार महासंघ के अध्यक्ष और नैथानी सचिव थे।