मौजूदा सरकार में ताजा मंत्री बने एक नेताजी आजकल काफी परेशान हैं। परेशान भी इस कदर कि पाला बदल का रास्ता ढूंढा जा रहा है।
मंत्री जी पर पहले ही बड़े ठाकुर के खास होने का ठप्पा लगा है, अब जुगत लगाकर मंत्री तो बन गए, लेकिन शानो शौकत का अभाव है। उन्हें वो शोहरत नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी।
इन महाशय ने अपने पुराने खेमे की खबरों को हुकूमत के मुखिया तक पहुंचाने का नया रास्ता ढूंढा। बस दिक्कत यह हो रही है कि सीधे कैसे कहें। कह भी देते हैं तो मुखिया के भरोसा करने में शक की गुंजाइश है।
दिन तो किसी तरह से कट जाता है, लेकिन इस उलझन में आजकल रातों की नींद हराम हो रही है।
इसलिए वह सूबे के मुखिया के खास लोगों को समझा रहे हैं कि विरोधी कबीले में क्या क्या हो रहा है। ताकि दरबारी मुखिया को बताए और फिर तसदीक करने के लिए मंत्री को बुला लिया जाए। बस इसी लम्हे के इंतजार में मंत्रीजी बेचैन हुए जा रहे हैं।