निर्दलीय हरीश चंद्र दुर्गापाल कांग्रेसी तो हो गए लेकिन कहीं न कहीं सक्रिय सदस्यता उनके लिए संकट बढ़ा सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल स्पष्ट कर चुके हैं कि विधानसभा में वह निर्दलीय विधायक की हैसियत से ही बैठेंगे। बावजूद संविधान विशेषज्ञों की मानें तो दलबदल कानून के तहत न्यायालय में चुनौती देने पर संबंधित विधायक की सदस्यता तक जा सकती है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने BJP को सुझाया रास्ता
दरअसल कांग्रेस के कुछ नेता नहीं चाहते हैं कि दुर्गापाल के बाद दिनेश धनै और मंत्री प्रसाद नैथानी कांग्रेसी हो जाएं। दुर्गापाल की कांग्रेसी कुनबे में वापसी से नाराज कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ही भाजपा को ये मुद्दा सौंपा है।
अगर इस मुद्दे को भाजपा आगे तक ले जाती है तो तय है कि अन्य लोगों की घर वापसी नहीं होगी। उन्हें 2017 तक घर केबाहर ही रहना होगा। 2002-2007 की विधानसभा में विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन निर्दलीय जीतकर आए थे।
उस समय उन्होंने भी कांग्रेस की सदस्यता लेनी चाही थी। तकनीकी और कानूनी उलझन के चलते ही तब उन्होंने खुद का रोक लिया था। 2012 में वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े।