कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री अमृता रावत ने पद बर्खास्त होने के बाद हरीश रावत पर निशाना साध कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
केंद्र में मोदी सरकार बनने की हलचल से उत्तराखंड की सियासत में भी तूफान खड़ा हो गया है।
अमृता ने हरीश रावत को खुद भी इस्तीफा देने को कहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था।
अमृता ने कहा कि हरीश रावत का यह कदम विनाश काले विपरीत बुद्घि जैसा है। उत्तराखंड में कांग्रेस की बहुत बुरी हार हुई है और यह चुनाव हरीश रावत के नेतृत्व में लड़े गए थे। इसलिए हार की नैतिक जिम्मेदारी उनकी ही बनती है।
अमृता ने की बहुगुणा की तारीफ
अमृता ने कहा कि हरीश रावत पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को खुद सीएम बने। उस दौरान उन्होंने सोनिया गांधी से तीन सीटों पर जीत होने का वादा किया था। लेकिन सभी सीटों पर बुरी हार हुई।
अमृता ने आगे कहा कि विजय बहुगुणा अगर सीएम पद पर होते तो शायद दो-तीन सीटें पार्टी को मिल भी जाती।
हरीश रावत को जहां हार की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए थी वहां उन्होंने जिम्मेदारी से भागकर एक महिला को बर्खास्त कर दिया। यह महिलाओं का अपमान है।
बढ़ेगी रावत की मुश्किलें
अमृता रावत की बर्खास्तगी के बाद रावत सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमृता रावत सतपाल महाराज की पत्नी हैं और माना जाता है कि हरीश सरकार में छह विधायक सतपाल महाराज ग्रुप के हैं।
हालांकि इन विधायकों को हरीश रावत ने दर्जाधारी मंत्री का दर्जा दे दिया है। लेकिन अगर भाजपा महाराज के नेतृत्व में सरकार बनाने की पहल करती है तो ये महाराज के समर्थन में रावत का साथ छोड़ सकते हैं।
इसके अलावा पीडीएफ के संयोजक मंत्री प्रसाद नैथानी भी महाराज के करीबी माने जाते हैं।