रामनगर में खनन माफियाओं की शरणस्थल बन चुके कोसी, दाबका नदी में वन कर्मी अब सुरक्षित नहीं है। विगत दिनों माफियाओं ने कोसी नदी में वनकर्मियों से मारपीट कर वर्दी फाड़ थी। वहीं अब नकाबपोश खनन माफियाओं ने छोई चौराहे पर एकजुट होकर वनकर्मियों की पिटाई कर दी।
इतना ही नहीं माफियाओं ने विभाग की किराए पर ली पिकप वाहन के शीशे तोड़कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। मामले में विभाग ने एक नामजद समेत कई अज्ञात के खिलाफ तहरीर सौंपी है।
कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में वन रक्षक छोई बीट सुरेश कुमार रवि ने बताया मंगलवार की सुबह वन विभाग की टीम ने अवैध खनन की सूचना पर दाबका नदी में छापेमारी की। इस दौरान टीम ने दाबका नदी में एक ट्रैक्टर ट्राली को कागजात नहीं होने पर सीज कर उसे छोई चौकी पर खड़ा करवा दिया।
सुरेश कुमार ने बताया विभागीय कर्मचारी जब किराए पर ली गई पिकप (यूके 03सीए0134) को लेकर रामनगर आ रहे थे कि इसी दौरान छोई चौराहे पर पहले से तैनात नकाबपोश खनन माफियाओं ने पिकप के शीशे तोड़ने के साथ ही वनकर्मियों, वाहन चालक से मारपीट कर दी।
घटना के बाद सभी बाइकों पर सवार होकर भाग गए। उन्होंने पुलिस से वनकर्मियों को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। एसएसआई मोहन चंद्र पांडे ने बताया कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। खनन माफियाओं को इस बार किसी कीमत पर बख्शा नहीं किया जाएगा। टीम में विनोद जोशी, शैलेंद्र सिंह चौहान, जमन चंद्र मवाड़ी शामिल थे।
डीएफओ को सुनाई खरी खरी
वनकर्मियों से लगातार हो रही अभद्रता, मारपीट से गुस्साए वनकर्मियों के सब्र का बांध आखिर टूट ही पड़ा। मंगलवार को गुस्से से तमतमाए दर्जनों वनकर्मियों ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ डा. सीके कविदयाल का घेराव कर खूब खरी खरी सुनाई।
कहा खनन माफिया लगातार हमले पर हमले किए जा रहे हैं, लेकिन वनकर्मियों की सुरक्षा करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने शीघ्र माफियाओं को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। डीएफओ ने तीन दिन के भीतर खनन माफियाओं को पकड़ने का आश्वासन दिया। जिसके बाद गुस्साए वनकर्मी शांत हुए।
विरोध में दो घंटे बंद रहे कोसी, दाबका गेट
छोई चौराहे पर दिनदहाड़े हुई मारपीट से गुस्साएं वनकर्मियों ने कोसी, दाबका गेटों पर ताला ठोक दिया। वनकर्मी स्वयं को असुरक्षित महसूस कर खनन माफियाओं के हमले से डरे सहमे हुए थे। जिस कारण उन्होंने कोसी, दाबका नदी के गेटो पर ताला ठोक विरोध में दो घंटे बंदी की। इस दौरान नदियों में लंबा जाम भी लगा रहा।
निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
क्षेत्र पंचायत सदस्य विरेंद्र मनराल ने घटना की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा किसी भी ग्रामीण को गलत तरीके से नही फंसाया जाए।
माफियाओं को सफेदपोश नेताओं की शरण
कोसी दाबका नदी में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शायद उनपर किसी सफेदपोश नेता का ही हाथ है जिस कारण माफियाओं पर कार्रवाई नही की जाती।
वह पहला मौका नहीं है जब किसी वनकर्मी पर माफियाओं ने हमला किया हो। इससे पहले भी कई हमले किए जा चुके हैं। वनकर्मियों पर हमले होने के बाद माफियाओं पर मुकदमा दर्ज तो कर दिया जाता है। लेकिन आज तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। आलम यह है कि माफिया अपना कोसी, दाबका में वर्चस्व स्थापित किए हुए हैं।