देहरादून जिले में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के सारे सरकारी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। लाख कोशिश के बावजूद खपत के अनुरूप दूध का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। यदि पश्चिमी यूपी से दूध ना आए तो राजधानी के लोगों को दूध ही ना मिले।
केवल आंचल डेयरी में ही हर रोज सहारनपुर और बिजनौर से 5000 लीटर दूध आ रहा है। दूध उत्पादन को बढ़ावा देने वाले सरकारी योजनाएं किस तरह से मुंह के बल गिर रही हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले की 143 दुग्ध विकास समितियां बंद हो चुकी हैं।
दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके इसके लिए सरकार की ओर से गंगा गाय योजना और दूध में प्रति लीटर तीन से चार रुपये प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद शुरूआती महीनों में इसका लाभ किसानों को मिला, लेकिन योजना के लड़खड़ाने से खपत के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
स्थिति यह है कि रायपुर की आंचल डेयरी में हर रोज 5000 लीटर से अधिक दूध ऊधमसिंह नगर और लालकुआं से स्टेट मिल्क ग्रिड एवं सहारनपुर और बिजनौर से नेशनल मिल्क ग्रिड के जरिये दून पहुंच रहा है। जबकि जनपद के दूरदराज के क्षेत्रों में 389 दुग्ध विकास समितियों में से 143 समितियां बंद हो चुकी हैं। कई अन्य बंदी के कगार पर हैं।
आंचल डेयरी में प्रतिदिन 15 हजार लीटर दूध आ रहा है, जबकि खपत 19 हजार लीटर से अधिक है। खपत को पूरा करने के लिए एसएमजी और एनएमजी से दूध लिया जा रहा है।
- नीरज कुमार, प्रबंधक डेयरी
जिले में 143 दुग्ध विकास समितियां सक्रिय नहीं हैं। 255 समितियां ही सही तरीके से काम कर रही हैं। दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- एसएस पाल, प्रधान प्रबंधक आंचल डेयरी
क्या करे प्रदेश सरकार
प्रोग्रेसिव डेयरी फारमर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं पूर्व डीएचओ वीडी कुशवाह के मुताबिक दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में कामधेनु योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत डेयरी किसानों को 20 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक डेयरी के लिए बिना ब्याज लोन दिया जाता है।
यूपी की तर्ज पर उत्तराखंड में भी कामधेनु योजना शुरू की जाए। हालांकि उत्तराखंड में नाबार्ड के तहत डेयरी के लिए छह लाख रुपये तक के लोन पर सामान्य किसान के लिए 25 फीसदी और एससी-एसटी के लिए 33 फीसदी अनुदान का प्रावधान है, लेकिन जानकारी के अभाव में किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।