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पहाड़ में तैनाती से बच रहे ‘सैन्य अफसर’

Mon, 22 Aug 2016 09:59 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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ऑफिसर - फोटो : demo pics
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सैनिकों, पूर्वसैनिकों, वीर नारियों और आश्रितों के कल्याणकारी योजनाओं के पर्वतीय जनपदों में क्रियान्वयन के लिए सैनिक कल्याण निदेशालय को अफसर नहीं मिल रहे हैं।
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सेना, वायुसेना और एयरफोर्स से कर्नल या समकक्ष रैंक के अफसर चयन के बाद भी ज्वाइन नहीं कर रहे। मई माह में निदेशक और चार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के लिए 9 अधिकारियों की मेरिट लिस्ट बनी। केवल एक अधिकारी ने सेवाएं देने को हामी भरी जबकि शेष ज्वाइन नहीं कर रहे।

सूत्रों के मुताबिक पर्वतीय जनपदों में तैनात दिये जाने से अधिकारी ज्वाइन नहीं कर रहे। ऐसे में अब नए सिरे से आवेदन मांगने की तैयारी चल रही है। मार्च माह में सैनिक कल्याण निदेशक और जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
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राष्ट्रपति शासन के दौरान 5 मई को निदेशक की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के पद विभाग के लिए समस्या बनी हुई है। चुनावी वर्ष में सैनिक कल्याण योजनाएं प्रभावित होने से विभाग पर रिक्त पदों को भरने का दबाव है, लेकिन दो बार मेरिट लिस्ट की वेटिंग से 6 अधिकारियों को ज्वाइनिंग लेटर भेजने के बाद भी सफलता नहीं मिली है।

सूत्रों के मुताबिक चयनित अधिकारी देहरादून जनपद में तैनाती चाहते हैं जबकि विभाग उन्हें पर्वतीय जनपदों में भेज रहा है। सचिव सैनिक कल्याण आनंद वर्धन ने बताया कि जिला सैनिक अधिकारी के पद पर दो  बार चयनित अभ्यर्थियों को कॉल लेटर भेजा गया, लेकिन वह ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। रिक्त पद भरे नहीं गए तो नए सिरे से आवेदन मांगे जाएंगे।

चयन में रहा है सियासी दखल
सैनिक कल्याण विभाग में नियुक्तियों में सियासी दखल की वजह से अधिकारियों के चयन प्रक्रिया लटकी रही। निदेशक से लेकर जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के पदों के लिए कई बार साक्षात्कार हुए, लेकिन सियासी कारणों से उन्हें रद्द किया जाता रहा।

जनवरी 2016 में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने निदेशक के 6 वर्ष से रिक्त पद पर आपत्ति जताते सीएम हरीश रावत को पत्र तक लिखा, लेकिन उस पद भी नियुक्ति राष्ट्रपति शासन के दौरान मई 2016  में हुई। जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के लिए भी दो बार साक्षात्कार हुए।
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