यमुनोत्री ग्लेशियर का इको सिस्टम बचाने के लिए यमुना बेसिन में ‘नो प्रोजेक्ट जोन’ चिह्नित किए जा रहे हैं।
गंगोत्री ग्लेशियर का गोमुख बहने के बाद अब यमुनोत्री ग्लेशियर की सेहत के मामले में एहतियात बरती जा रही है। इको सिस्टम बचा रहे इसके लिए जल-जंतु क्षेत्र बनाने की कार्ययोजना बनाई गई है, साथ ही यमुना बेसिन के ऊपरी हिस्से में जल विद्युत समेत किसी भी प्रोजेक्ट को नहीं लगाने की सलाह दी गई है।
यमुना बेसिन में बड़कोट से व्यासी तक 30 किमी क्षेत्र में किसी प्रोजेक्ट के बजाए जलजंतु जोन बनाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एक तो यह जल-जंतुओं का क्षेत्र है, इसके अलावा वाहनों और लोगों की आवाजाही से यहां जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बढ़ने का खतरा विज्ञानियों ने बताया है। गोविंद पशु विहार के पास भी एक्वेटिक जोन बनाने की विज्ञानी सलाह दे रहे हैं।
विज्ञानियों का कहना है कि इको सिस्टम बचाने के लिए सड़कें बनने, मानव गतिविधियां बढ़ने और प्रोजेक्ट लगने से यहां का तापमान बढ़ सकता है, जिससे इको सिस्टम प्रभावित होगा। तापमान बढ़ने से यमुनोत्री ग्लेशियर पर खतरा और बढ़ जाएगा।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) ने यहां 30 किमी लंबा जल-जंतु जोन बनाने की सलाह दी है।
परिषद के वरिष्ठ विज्ञानी डा. सुधीर कुमार की अगुवाई में यहां सर्वे किया गया था। आईसीएफआरई ने यह रिपोर्ट प्रदेश शासन को भी दी है।
यमुना बेसिन के जानकी चट्टी, हनुमान चट्टी आदि जगहों पर जल विद्युत परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। विज्ञानियों ने यमुना बेसिन के बजाए सहयोगी नदियों में प्रोजेक्ट लगाने का मशविरा दिया है। परियोजनाओं के लिए टोंस बेसिन को बेहतर माना जा रहा है। यहां पर अन्य नदियों की तुलना में पानी भी अधिक है।