वर्ष 2010 और 2012 में आई आपदा के बाद भैंसियाछाना ग्रामसभा के खैरखेत और बूढ़ाधार तोकों के प्रभावित 10 परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।
उसके बाद 2012 में भी भूस्खलन के बाद चार अन्य परिवारों को भी गांव से हटा दिया गया। इनमें से छह परिवार जूनियर हाईस्कूल खैरखेत के भवन में रह रहे हैं। 2012 में विस्थापित किए गए चार परिवारों ने अन्य लोगों के घरों में शरण ली है। इसके लिए भूमि के आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आवास बनाने का काम शुरूनहीं हुआ है।
भैंसियाछाना ब्लॉक के खैरखेत गांव की पहाड़ी में पिछले कई सालों से भूस्खलन हो रहा है। 2010 में इस गांव में भारी भूस्खलन के बाद अनेक ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन बर्बाद हो गई। खतरे की जद में आए छह परिवारों को घर छोड़ने पड़े। इनमें गोविंद राम, सुजान राम, बहादुर राम, दनी राम, किशन राम, हरीश राम के परिवार शामिल हैं। इन परिवारों को खैरखेत में स्थित जूनियर हाईस्कूल में शरण दी गई है।
इन लोगों के जानवरों को गांव के पंचायत घर में जगह दी गई है। उसके बाद 2012 में दोबारा हुए भूस्खलन के बाद गोपाल सिंह, गोविंदी देवी, बहादुर सिंह, कुंदन सिंह के परिवारों को भी घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। इन सभी परिवारों की स्थिति खानाबदोशों जैसी हो गई है। यह लोग किसी तरह मजदूरी आदि करके जीवन यापन कर रहे हैं। बूढ़ाधार, खैरखेत तोकों में रहने वाले इन 10 परिवारों के साथ ही अन्य घरों को भी बरसात में खतरा उत्पन्न हो जाता है।
दोनों तोक ही भूस्खलन से खतरे की जद में हैं और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इन परिवारों को सुरक्षित स्थान में शिफ्ट करने का सुझाव दिया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने गांव के पास ही एक सुरक्षित जगह पर सभी परिवारों के घर बनाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली है। इस जगह पर सभी परिवारों को एक-एक नाली भूमि आवंटित की जा रही है।
प्रभावित ग्रामीणों की मांग है कि सरकार को उनके लिए शीघ्र आवास का निर्माण करना चाहिए, लेकिन इस ओर कुछ नहीं किया जा रहा है। एक साल पहले प्रशासन ने इस स्थल पर पानी, बिजली की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके लिए भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस बार भी थमा दिया जाएगा टैंट और लालटेन
बूढ़ाधार और खैरखेत के प्रभावित लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन ने सुरक्षित जगह पर उनके लिए आवासों का निर्माण नहीं करवाया है और अब बरसात आने पर पिछले साल की तरह इस बार फिर से उन्हें एक-एक टैंट, लालटेन थमाकर घर छोड़ने को कह दिया जाएगा। जिस स्थान पर टैंट लगाए जाते हैं वहां पानी, बिजली तक की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि गुरुवार को प्रभावितों का एक शिष्टमंडल बीडीसी सदस्य संतोष कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी मुलाकात करेगा।
पहले अनाज बेचते थे आज दाने-दाने को मोहताज
भूस्खलन के कारण खैरखेत, भैंसियाछाना, रमतोला, तिलागाड़ा, कोटगाड़ा, गोठली गांवों में ग्रामीणों की सैकड़ों नाली उपजाऊ जमीन बर्बाद हो चुकी है। कई ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले तक वह खुद खेती करके अपनी उपज बेचते तक थे, लेकिन आज खुद सस्ता गल्ला की दुकान से राशन खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है।
प्रभावितों के विस्थापन के लिए भूमि आवंटन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। चिन्हित स्थल में पानी, बिजली की व्यवस्था करने के साथ ही प्रभावितों को आवास के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। ताकि प्रभावितों को कोई दिक्कत नहीं हो।
- मनोज तिवारी, विधायक