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प्रवासी नेपाली संगठन ने कहा- ‘नेपाल का भी तिब्बत जैसा हश्र न कर दे चीन’

Thu, 17 Sep 2020 09:59 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़

सार

  • प्रवासी नेपाली संगठन के केंद्रीय संयोजक ने कहा कि भारतीय शहरों को नेपाल का हिस्सा बताने के पीछे ओली सरकार के समर्थक 
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नवीन कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाल में जिस तरह से भारत विरोधी गतिविधियां चल रही हैं, उससे भारत में रहने वाले प्रवासी नेपाली भी खुश नहीं हैं। प्रवासी नेपाली संगठन के नवीन कुमार का कहना है कि जिस चीन के साथ आज नेपाल की ओली सरकार मधुर संबंध बनाना चाह रही है, वहीं चीन एक दिन तिब्बत की तरह नेपाल को भी हड़प लेगा। 

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प्रवासी नेपाली कल्याणकारी संगठन के केंद्रीय संयोजक नवीन कुमार ने पिथौरागढ़ में प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि सत्तासीन केपी ओली सरकार नेपाल को भारत विरोधी बनाकर विस्तारवादी चीन के साथ अपने मधुर संबंध बनाना चाहती है।

कहीं ऐसा न हो कि चीन नेपाल को पूरी तरह से पंगु बनाकर तिब्बत की तरह हड़प ले। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने में सहायता की। भारत आज भी रोटी-बेटी के संबंधों को पूरी तरह से निभा रहा है। नेपाल पर जब भी विपत्ति आई भारत ने ही मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। 

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भारत के साथ रोटी-बेटी के संबंधों को बनाए रखें

नवीन कुमार का कहना है कि ओली सरकार भारत विरोधी बयानबाजी करके भारत में रह रहे प्रवासी मेहनतकश कामगारों के हितों का हनन कर रही है। केंद्रीय संयोजक ने कहा कि भारतीय क्षेत्र और यहां के शहरों को नेपाल का हिस्सा बताकर जिस तरह से नेपाल के सोशल मीडिया में दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह गलत है।

उन्होंने कहा कि इस दुष्प्रचार के पीछे भी नेपाल सरकार के समर्थकों का हाथ है। कहा कि नेपाल सरकार को दुष्प्रचार रोककर भारत के साथ रोटी-बेटी के संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रयास करने चाहिए। 

लिपुलेख, कालापानी को नेपाली मुद्रा में अंकित करना ठीक नहीं
नवीन कुमार ने कहा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाली मुद्रा में अंकित करना राष्ट्रहित में सही नहीं है। इससे अच्छा तो यह होता कि नेपाल के जो बाजार चीनी सामान से भरे पड़े हैं, उस पर प्रतिबंध लगाया जाता। उन्होंने कहा कि नेपाल को भारत से प्रेरणा लेकर स्वराज और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए। 
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