उत्तराखंड मुख्यमंत्री की पहल पर पर्यटन विभाग की ओर से शुरू की गई ‘मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ’ योजना बुजुर्गों को नहीं भाई। इसीलिए तो विभाग तय लक्ष्य के आस-पास भी नहीं फटक रहा है।
विभाग को वर्ष 2015 से मार्च 2016 तक 4225 बुजुर्गों को यात्रा में भेजना था, लेकिन अब तक मात्र 790 यात्री ही यात्रा में भेजे गए हैं। मार्च में इस वर्ष की योजना का टारगेट पूरा करना था, लेकिन विभाग टारगेट से कोसों दूर है।
योजना के प्रति बुजुर्गों की बेरुखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिल्ली स्थित निजामुद्दीन औलिया दरगाह में अब तक एक भी यात्री नहीं गया। जो यात्री चारधाम गए भी वह भी खुश होकर नहीं लौटे। हाल ही में यात्रा कर लौटे एक बुजुर्ग ने तो तमाम अव्यवस्थाओं को लेकर विभाग में आरटीआई भी दायर की थी।
योजना के तहत 65 वर्ष और इससे अधिक के श्रद्धालुओं को तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। वर्ष 2015 मार्च से 2016 तक राज्यभर से करीब 25 हजार और दून जिले से 4225 श्रद्धालु भेजे जाने थे। जब योजना शुरू हुई तो सिर्फ गंगोत्री और बदरीनाथ के लिए ही थी। सिख समुदाय की मांग पर इसमें रीठा-मीठा साहिब गुरुद्वारा को भी शामिल कर लिया गया।
इसके बाद दिल्ली स्थित निजामुद्दीन औलिया की दरगाह को भी शामिल किया गया। 4225 श्रद्धालुओं को इन चारों स्थानों की यात्रा करानी थी। चारधाम के कपाट बंद होने के बाद से गंगोत्री और बद्रीनाथ तो कोई श्रद्धालु नहीं जा सका, लेकिन रीठा-मीठा साहिब जाने में भी बुजुर्गों ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
वहीं, दिल्ली स्थित निजामुद्दीन औलिया के लिए तो एक भी आवेदन तक नहीं आया। योजना के इस तरह से फ्लाप होने के पीछे विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार न करना मुख्य वजह माना जा रहा है।
विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार किया गया था। ब्लॉक स्तर पर भी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। इसके बावजूद भी बुजुर्ग यात्रा के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। अब भी कोई बुजुर्ग जाना चाहता है तो आ सकता है।
- वाईके गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
अब तक कहां, कितने गए श्रद्धालु
बद्रीनाथ- 500
गंगोत्री-186
रीठा-मीठा साहिब- 104
निजामुद्दीन औलिया- 00
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कुल संख्या- 790