नए लोकायुक्त विधेयक पर 6 नवंबर को सरकार अपनी स्थिति साफ करेगी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक दल और सरकार के सहयोगी दलों के विधायकों की बैठक बुलाई है। इसमें नए विधेयक पर चर्चा करने के बाद फैसला लिया जाएगा।
नए लोकायुक्त विधेयक में तमाम खामियां बता कर कांग्रेस जहां इसे खारिज करने की बात कह रही है, वहीं सरकार के सहयोगी दल इसे लागू करने पर जोर दे रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष भी विधेयक को लागू करने की ही पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार उलझन में पड़ गई है।
विरोध का फायदा भाजपा उठाने को आतुर
कांग्रेस के विधेयक के विरोध का फायदा भाजपा उठाने को आतुर है। इससे सरकार के सहयोगी दूसरे दल चिंतित हैं। यही कारण है कि वे सरकार पर विधेयक लागू करने का दबाव बना रहे हैं।
इस संबंध में अंतिम फैसला अब कांग्रेस विधायक दल और सरकार के सहयोगी दलों के विधायकों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बुधवार को सचिवालय में पत्रकारों को बताया कि 6 नवंबर को सीएलपी की बैठक बुलाई गई है।
लोकायुक्त को लेकर तमाम बातें उठ रही
बैठक में ही तय होगा कि नए लोकायुक्त विधेयक को लागू करना है, संशोधित करना अथवा इसे निरस्त कर नया विधेयक बनाना है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त को लेकर तमाम बातें उठ रही हैं, जो कि गलत है।
संविधान भी 110 बार संशोधित किया जा चुका है, इसे किसी का अपमान नहीं कहा जा सकता। किसी भी विधेयक को लागू करना अथवा निरस्त करना राज्य की सरकार का विशेषाधिकार है।
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