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मसूरी की मीना के ग्रीटिंग कार्ड बनाने के कार्य पर कोरोना ने लगाया ब्रेक , उनके हस्तकला को नही मिला प्रोत्साहन ,

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शहर की मीना किचन गार्डन और जंगली फूलों से ग्रीटिंग कार्ड बनाकर अपना घर-परिवार चलाती थीं। ग्रीटिंग ऐसे थे कि स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी भी मीना के हुनर के कायल हो जाते थे। बीते साल से कोरोना संक्रमण ने मीना के इन हुनर पर ब्रेक लग गया है। कामकाज ठप होने से मीना का परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
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शहर के लंढौर निवासी मीना घर पर ही खूबसूरत ग्रीटिंग कार्ड बनाती हैं। कार्ड पर लगने वाले फूल असली होते हैं। इसलिए मीना के कार्ड प्रकृति के करीब होने का एहसास कराते हैं। मीना अपने किचन गार्डन में उगाए फूल ही इस्तेमाल करती हैं। बगीचे के फूल कम पड़ने या वैरायटी के लिए जंगली फूल भी इस्तेमाल करती हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण की वजह से इस कार्य पर ब्रेक लग गया है। ग्रीटिंग कार्ड की डिमांड बहुत कम हो गई है। इससे आमदनी प्रभावित हो गई है। मीना बताती हैं कि पिछले 23 साल से ग्रीटिंग कार्ड बनाने का काम कर रही हैं। फूलों को पहले पेपर के अंदर रखकर प्रेस करना होता है। इसके बाद कुछ दिन फूलों को सुखाना पड़ता है। कुछ दिन बाद ग्रीटिंग कार्ड में लगाया जाता है। कार्ड में असली फूल लगते हैं। कार्ड में एक बार फूल लगने के बाद जल्दी से निकलता नहीं है। ग्रीटिंग कार्ड को उच्च गुणवत्ता के कागज से बनाया जाता है, जो जल्दी खराब नहीं होता। इन कार्डों को स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी भी हाथों-हाथ खरीद लेते थे। पूर्व में शहर की प्रदर्शनी में इन कार्डों की जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जमकर तारीफ की थी। होली-दीपावली सहित नए साल पर इन कार्डों की खूब मांग रहती थी। स्कूल-कॉलेज में समारोह के वक्त भी फूल वाले ग्रीटिंग खूब बिकते थे। फिलहाल कोरोना संक्रमण के वजह से काम ठप है। संवाद
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