वैसे तो उत्तराखंड के अधिकतर अस्पताल बदहाल हैं, लेकिन जहां पर सुविधाएं देने का दावा किया जाता है, वहां भी मरीजों को दवा कम, दुआ का ही सहारा है।
डॉक्टरों की कमी की वजह से इलाज के लिए भटकने वाले मरीजों को अब दवा भी नसीब नहीं हो पा रही है। वह भी स्वाइन फ्लू जैसी घातक बीमारी की। पूरे प्रदेश के लिए दून अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड तो बना दिया गया, लेकिन यहां पर इस बीमारी की केवल आठ टैबलेट ही बची है।
यही नहीं, बच्चों को टीका लगवाने के लिए बुधवार को दून महिला अस्पताल पहुंची माताओं को संबंधित दवा नहीं मिलने के कारण भटकना पड़ा।
नहीं मिल रही स्वाइन फ्लू की दवा
स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए दवा की मांग बढ़ने के कारण संबंधित कंपनियों से दवाओं की खेप मिलने में देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र को प्रदेश के मौजूदा हालात से अवगत करवाकर तुरंत दवाओं की खेप की मांग की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दवा निर्माण के लिए अधिकृत कंपनियों से ही दवा खरीदी जा सकती है।
स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए टेमिफ्लू सहित एक अन्य दवा चाहिए होती है। इसके लिए जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को खरीद के निर्देश दिए हैं। जिलों ने दवा निर्माता कंपनियों को मांग भेजी है, लेकिन इस समय चल रही व्यापक मांग के चलते खेप नहीं पहुंच रही है। स्वाइन फ्लू के देश भर में बढ़ते मामलों के चलते दवा की कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है।
पहले केंद्र से आती थी दवा
स्वाइन फ्लू की दवाएं हर वर्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मुहैया करता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसकी जरूरत कम रहने से काफी संख्या में दवाएं एक्सापयर हो गईं। ऐसे में इस बार केंद्र को मांग नहीं भेजी गई। स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर से दवाएं खरीदने का फैसला लिया, जो उलटा पड़ गया।
दवा के लिए केंद्र ने जो कंपनियां चिह्नित की हैं, उन्हें काफी समय पहले मांग भेज दी है, लेकिन दो बार वहां संपर्क करने के बावजूद खेप नहीं मिली है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क कर दवा की मांग की है।
- डॉ. जीएस जोशी, महानिदेशक