दून के रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक को फोन पर धमकी मिली है।
इस मामले में सामुदायिक केंद्र को पीपीपी मोड में चलाने वाली राजभ्रा कंपनी के प्रबंध निदेशक रजनीश कश्यप के खिलाफ रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। डॉक्टरों ने आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा
जानकारी के अनुसार, डॉ. नरेश नपलच्याल को स्वास्थ्य केंद्र में अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। डॉ. नपलच्याल ने करीब एक हफ्ते पहले मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को इस बारे में रिपोर्ट दी। सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीके चक्रपाणि को जांच का जिम्मा सौंपा था।
आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों को इसकी जानकारी लग गई। मंगलवार दोपहर डॉ. नपलच्याल के मोबाइल पर धमकी भरा संदेश आया। बाद में मोबाइल पर कॉल कर भी धमकी दी गई। डॉ. नपलच्याल का कहना है कि कॉल करने वाले ने खुद को राजभ्रा मेडिकेयर कंपनी का एमडी (प्रबंध निदेशक) बताया।
कॉल करने वाले ने कहा कि उनके खिलाफ शिकायत करना महंगा पड़ेगा। कॉल करने वाले शख्स ने डॉ. नपलच्याल को गंभीर परिणाम की धमकी भी दी। डॉ. नपल्चयाल ने सीएमओ और प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ के पदाधिकारियों को घटना की जानकारी दी। डॉ. नपलच्याल ने रायपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
‘धमकी का आरोप बेबुनियाद है। काल डिटेल से इसका पता लग जाएगा। जिन अनियमितताओं की बात डा. नपलच्याल कह रहे हैं, उस बारे में हम खुद पहले ही शासन को बता चुके हैं। विभाग जांच करना चाहता तो हमें कोई एतराज नहीं है।’
- रजनीश कश्यप, एमडी राजभ्रा मेडिकेयर
मरीजों की जांच से भर रही है कंपनी की जेब!
रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नपलच्याल को शिकायत मिली थी कि मरीजों की जरूरत से ज्यादा जांच कराई जा रही है। डॉ. नपलच्याल ने राजभ्रा मेडिकेयर कंपनी के रिकार्ड खंगाले तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
पता चला कि गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा को कंपनी ने कमाई का जरिया बना लिया है। डॉ. नपलच्याल के अनुसार जांच में पता चला कि बिना जरूरत कई मरीजों का दो से तीन बार अल्ट्रासाउंड और विभिन्न पैथोलॉजी जांचें कराई गई थीं। खासकर गर्भवती महिलाओं को कंपनी के डॉक्टरों ने जरूरत से ज्यादा जांचों की सलाह दी थी।
इनमें ज्यादातर बीपीएल परिवारों के मरीज थे, जिन्हें सरकार द्वारा निशुल्क जांच या उपचार की सुविधा मिलती है। कंपनी इसका भुगतान सरकार से लेती है।
रिकॉर्ड का आडिट किया गया तो यह बात सामने आई कि इससे सरकार को हर महीने लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखने की शिकायतें भी मिली थीं।
कंपनी के अधिकारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। कंपनी सहयोग नहीं करेगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भी सूचित किया जा रहा है।
- डॉ. एसपी अग्रवाल, मुख्य चिकित्साधिकारी