ऐसे में अगर भाजपा इस मुद्दे पर आरोपी नेता को हटाने संबंधी आधिकारिक घोषणा या बयान जारी करती है तो विरोधी दलों को हमले का ठोस आधार मिल जाएगा। और फिर भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर मी टू पर अपमानजनक किरकिरी का सामना करना पड़ेगा। इस नए राजनीतिक खतरे को भांपते हुए भाजपा हाईकमान मौन रहकर इस ज्वालामुखी के ठंडे होने के इंतजार में है।
गौरतलब है कि मी टू पर प्रदेश भाजपाध्यक्ष अजय भट्ट ने रविवार को बयान देने की बात कही थी। लेकिन उनका कोई बयान नहीं आया। भाजपा से जुड़े सूत्र का कहना है कि उत्तराखंड के मौजूदा निकाय चुनाव की वजह से भी आरोपी की विदायी की आधिकारिक घोषणा नहीं की जाएगी।
पद से हटाने के फैसले के सार्वजनिक होते ही विपक्ष पूरा चुनाव मी टू पर शिफ्ट कर देगा। चुनाव में यही एक मुद्दा छाया रहेगा। और समूचे प्रदेश में भाजपा उम्मीदवारों को स्थानीय स्तर पर भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बैकफुट पर आयी भाजपा पूरे चुनाव भर जवाब ही देती रह जाएगी। उत्तराखंड का निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव की रिहर्सल माना जा रहा है। निकाय चुनाव में जीत-हार से प्रदेश भाजपा नेतृत्व के भविष्य की दशा-दिशा भी तय होगी।
आरोपी की विदायी की पुष्ट घोषणा के संभावित खतरों का दिल्ली व देहरादून में गहन मंथन के बाद भाजपा नेतृत्व ने होंठ सिल लिए हैं। मी टू का चर्चित आरोपी नेता का मोबाइल स्विच ऑफ है। वो अभी तक कार्यालय सामान लेने भी नहीं आया है। विरोधी दलों की निगाहें पीड़िता के अगले कदम पर टिकी है। पीड़िता के प्राथमिकी दर्ज कराते ही सन्नाटे में बैठे भाजपा नेतृत्व को भी चुप्पी तोड़नी पड़ेगी। ये क्षण भाजपा के लिए विशेष कष्टकारी साबित होगा।
मी टू पर महिला ताल ठोक कर सामने आती है। अभी तक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई है। आप ही बताएं क्या बयान दूं।
-अजय भट्ट, प्रदेश भाजपाध्यक्ष