उत्तराखंड कांग्रेस के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री समेत तीन विधायकों ने एमडीडीए की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में महायोजना 2025 पर फोकस किया।
विधायकों ने जवाबदेही जनता के प्रति है लेकिन एमडीडीए में स्थानीय विधायकों से सुझाव लेने या संवाद बनाए रखने की परंपरा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कमिश्नर गढ़वाल जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी
पूर्व मंत्री व विकासनगर से कांग्रेस विधायक नवप्रभात, राजपुर रोड विधायक राजकुमार व रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है।
एमडीडीए की महायोजना 2025 में खामियों की शिकायतों पर कैबिनेट ने यह मामला विधानसभा समिति को संदर्भित किया लेकिन आज तक कोई निर्णय नहीं हो सका।
महायोजना बनाने का मूल सिद्धांत भू-उपयोग की घोषणा होती है लेकिन इसी बिन्दु पर सबसे ज्यादा गड़बड़ी है। नियम कहता है कि एक महायोजना में प्रस्तावित भू-उपयोग को दूसरी महायोजना में निचले स्तर के भू-उपयोग में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
लैंड यूज चेंज की जांच कराई जाए
यानि किसी महायोजना की कृषि भूमि को अगली महायोजना में व्यावसायिक या आवासीय तो किया जा सकता है लेकिन आवासीय भूमि को कृषि में तब्दील नहीं किया जा सकता। लेकिन मौजूदा महायोजना में इस नियम को अनदेखी करने से अफसरों पर लगे भ्रष्टाचार व वसूली के आरोपों को बल मिलता है।
यह मामला विधानसभा में भी नियम-54 में रखा गया लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। विधायकों ने मांग की है कि 2007 से 2013 के बीच हुए लैंड यूज चेंज की जांच कराई जाए। क्योंकि कई गांवों में किसानों व ग्रामसभा की जमीन को बदल कर बिल्डरों को फायदा पहुंचाया गया।