देहरादून के नियोजित विकास को लेकर गठित नियामक संस्था मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के पिछले पांच साल के कार्यकाल का स्पेशल ऑडिट होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्पेशल ऑडिट करने के आदेश दिए हैं। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने एमडीडीए के कामकाज का ऑडिट कराने को लेकर प्रस्ताव दिया था।
एमडीडीए की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्पेशल ऑडिट में प्राधिकरण के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने ‘अमर उजाला’ को एमडीडीए का स्पेशल ऑडिट कराने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में आदेश कर दिए हैं। संपर्क करने पर सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने कहा कि अभी उन्हें स्पेशल ऑडिट के संबंध में आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश मिलने के बाद वित्त विभाग ऑडिट प्रकोष्ठ जांच शुरू करेगा।
इसलिए हुआ है एमडीडीए का गठन
मसूरी और देहरादून के नियोजित विकास के उद्देश्य से एमडीडीए का गठन हुआ। मास्टर प्लान तैयार कराकर एमडीडीए शहर के भूमि उपयोग का निर्धारण करता है। वह हाउसिंग प्रोजेक्ट पर भी काम करता है। उसका काम शहर की भावी चुनौतियों और जरूरतों को ध्यान में रख कर भवन निर्माण की योजना तैयार करना है।
उठते रहे हैं कार्यशैली पर सवाल
हालात ये हैं कि वर्तमान में एमडीडीए की मुख्य भूमिका नक्शे पास करने और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने की है। अतिक्रमण के मामलों में भी उसका जोर कार्रवाई करने के बजाय दंड वसूलने पर ज्यादा रहता है। गलत और अनियोजित निर्माण को कंपाउंड फीस के जरिए नियोजित करने की प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवालात उठते रहे हैं।
हमेशा विवादों में रही एमडीडीए की योजनाएं
एमडीडीए की तमाम योजनाओं पर सवाल उठते रहे हैं। चकराता रोड और डिस्पेंसरी रोड रिडेवलपमेंट प्लान से लेकर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना तक सवालों के घेरे में रही। यही कारण है कि सरकार ने प्राधिकरण के स्पेशल ऑडिट के आदेश दिए हैं। एमडीडीए का गठन शहर में नियोजित विकास को बढ़ावा देने और अनियोजित विकास पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन बाद के वर्षों में एमडीडीए को आवासीय योजनाओं के निर्माण और रिडेवलपमेंट प्लान लागू करने जैसे अन्य काम भी सौंप दिए गए। चकराता रोड और डिस्पेंसरी रोड रिडवेलपमेंट प्लान लागू करते वक्त गड़बड़ी के आरोप लगे थे।
वहीं, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना में भी अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। फरवरी 2016 में नक्शा पास कराने के एवज में एक सुपरवाइजर को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया था। बाद में इसमें कुछ अन्य एई और जेई की संलिप्तता भी सामने आई थी। बतौर नोडल एजेंसी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार करते समय चाय बागान के मामले में भी खासा विवाद हुआ था। चाय बागान को प्रोजेक्ट में शामिल करने पर अड़ी एमडीडीए को विरोध के बाद कदम पीछे खींचने पड़े थे।
पांच साल में एमडीडीए की परियोजनाएं
-चकराता रोड रिडवलपमेंट प्लान
-डिस्पेंसरी रोड रिडवलपमेंट प्लान
-आईएसबीटी हाउसिंग प्रोजेक्ट (अफोर्डेबल)
-ट्रांसपोर्टनगर फेज टू हाउसिंग प्रोजेक्ट
-ट्रांसपोर्टनगर एमआईजी हाउसिंग प्रोजेक्ट
-सहस्त्रधारा रोड में आलयम हाउसिंग प्रोजेक्ट
-रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम
-इंदिरा मार्केट रिडवलपमेंट प्लान पर काम शुरू
-100 से अधिक पार्क विकसित किए
-शहर के 13 चौराहों का चौड़ीकरण व सुंदरीकरण
-शहर में कई स्थानों पर म्यूरल निर्माण
-घंटाघर एमडीडीए कांप्लेक्स में आर्ट गैलरी का निर्माण
-मसूरी में म्यूजिकल फाउंटेन निर्माण व शहीद स्मारक सुंदरीकरण
-स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बतौर नोडल एजेंसी प्रोजेक्ट तैयार करने और पास कराने में रही अहम भूमिका