रिवर राफ्टिंग और अन्य जल व साहसिक खेलों पर लगी रोक हटाने के लिए सरकार जल्द ही हाईकोर्ट में दस्तक देगी। हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जल और साहसिक खेलों पर रोक लगा दी थी। इसके पीछे कोर्ट ने संबंधित नियमावली के अभाव को वजह बताया था। हालांकि रिवर राफ्टिंग व कुछ एक खेलों की नियमावली पहले से तैयार थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सभी खेलों की नियमावली समयबद्ध ढंग से बनाने के लिए कहा था। त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल ने अब उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के स्तर पर तैयार उत्तराखंड फुट लांच ऐरो स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग और उत्तराखंड रिवर राफ्टिंग व क्याकिंग संशोधित नियमावली पर मुहर लगा दी है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, नई नियमावली में रिस्पाेंसिबल और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही, इस क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों के आर्थिक हितों को संरक्षित करने का भी पूरा प्रयास किया गया हैे। उन्होंने आशा प्रकट की कि जल्द ही राज्य में फिर से एडवेंचर स्पोर्ट्स की गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित की जा सकेंगी। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने बताया कि नई नियमावली में हाईकोर्ट के दिए गए निर्देशों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में एरो स्पोर्ट्स तथा व्हाइट वाटर स्पोर्ट्स पर लगी रोक को हटाने के लिए जल्द ही सरकार न्यायालय में अपना पक्ष रखेगी।
नियमावली की खास बातें
01- राज्य में किसी भी प्रकार की साहसिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद को सारे अधिकार दे दिए गए हैं। राज्य में किसी भी प्रकार की साहसिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अनुज्ञा प्राधिकारी होगी।
02 - नई राफ्टिंग नियमावली में प्रत्येक नदी में विशेष अभियानों के लिए अनुमति प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही हाईकोर्ट की अपेक्षा के अनुसार गंगा नदी में प्रदूषण रोकने के लिए राफ्टिंग ढुलान के लिए प्रयुक्त होने वाले वाहनों को नदी तट से न्यूनतम 100 मीटर दूरी के आगे ले जाना पूर्णत: निषेध होगा।
03 - राफ्टिंग तकनीकी समिति नदियों के दोनों किनारों पर राफ्टों को नदी में उतारने व निकालने के स्थानों का चिह्नीकरण करेगी। इसके बाद राफ्ट को इन चिह्नित स्थानों से ही नदी में उतारा और निकाला जा सकेगा।
04 - नई नियमावली के अनुसार, जिन नदियों पर राफ्टिंग गतिविधियां संचालित नहीं की जा रही हैं, उनके तट पर उपलब्ध राजस्व अथवा वन भूमि में किसी प्रकार की पर्यटन गतिविधि के संचालन के लिए भूमि आवंटन से पूर्व पर्यटन विभाग की अनुमति प्राप्त किया जाना आवश्यक होगा। राफ्टिंग ऑपरेटरों के स्तर पर राफ्टिंग अनुज्ञा हस्तांतरण के प्राविधान में भी संशोधन किया गया है।
05 - प्रत्येक ऑपरेटर को राफ्टिंग शुल्क की दरें स्वागत कक्ष/ब्रोशर/वेबसाइट में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। पर्यटकों के नशे आदि की हालत में राफ्टिंग करवाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगा।
प्रमुख बिंदु
- पैराग्लाइडिंग से जुड़े संचालकों, पायलट्स और इंस्ट्रक्टर्स की योग्यताओं का निर्धारण, भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।
- पैराग्लाइडिंग की गतिविधियों के नियंत्रण और उपकरणों की जांच के लिये तकनीकी समिति और नियामक समिति का गठन किया गया है।
- तकनीकी समिति प्रदेश में नए पैराग्लाइडिंग स्थलों का चयन करेगी और इन स्थलों पर पैराग्लाइडिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने की कार्रवाई करेगी।
- पूर्व से कार्यरत संचालकों, पायलट्स को आवश्यक शैक्षिक योग्यता प्राप्त करने के लिए दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। मगर नियमावली में प्राविधानित तकनीकी योग्यता आवश्यक होगी।
- प्रत्येक ऑपरेटर को अधिकतम 10 और न्यूनतम दो टेंडम पैराग्लाइडर संचालित करने की अनुमति प्रदान करने का प्राविधान किया गया है।
- नियमावली के प्रभावी होने की तिथि से पूर्व में इस व्यवसाय को संचालित करने वाले ऑपरेटरों को इस नियमावली के अंतर्गत पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। पैराग्लाइडिंग व्यवसाय के संचालन से पूर्व उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद से अनुमति प्राप्त की जानी आवश्यक होगी।
- टेंडम पायलट बनाने के लिए न्यूनतम 100 घंटों की उड़ान का अनुभव होना आवश्यक होगा, जबकि मुख्य प्रशिक्षक हेतु न्यूनतम 200 घंटों की उड़ान तथा एक समय पर 50 किमी लंबी उड़ान का अनुभव होना और पैराग्लाइडिंग सेफ्टी कोर्स में प्रशिक्षित होना अति-आवश्यक होगा।
- इस नियमावली में पैराग्लाइडिंग से संबंधित गतिविधियों को सुरक्षित बनाने के उदेश्य से समय-समय पर स्थापित मानकों का समावेश किया गया है।
- नई नियमावली में पैराग्लाइडिंग के लिए यूनिफार्म/ड्रेस, सुरक्षा उपकरणों से लेकर आयु सीमा तक के मानकों का निर्धारण किया गया है।
- प्रत्येक पैराग्लाइडिंग आपरेटर को विधिवत कार्यालय स्थापित करना होगा, जबकि पैराग्लाइडिंग के लिए निर्धारित प्रमाणिक दरों को स्वागत पटल, ब्रोशर्स एवं वेबसाइट में प्रदर्शित किया जाना आवश्यक होगा।
- आपरेटर के स्तर पर पैराग्लाइडिंग में भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का इंश्योरेंस करवाया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही उसे प्रत्येक पर्यटक की विधिवत सूचना भी संकलित करनी होगी।