राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को एमडी डिग्री धारक मेडिकल ऑफिसरों से पूरा किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेजों की मान्यता को बचाने के लिए सरकार इसी कवायद में जुटी है। प्रदेश भर की होम्योपैथिक डिस्पेंसरियों में तैनात मेडिकल ऑफिसरों में से एमडी डिग्री धारकों की तलाश की जा रही है।
मांगी गई है जानकारी
इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजकर स्थायी शिक्षकों की भर्ती होने तक उन्हीं से शिक्षण कार्य कराया जाएगा। शासन के निर्देश पर होम्योपैथी निदेशालय प्रदेश भर की होम्योपैथिक डिस्पेंसरियों में तैनात एमडी डिग्री धारक मेडिकल ऑफिसर तलाश रहा है।
सभी जिला होम्योपैथी अधिकारियों को उनके यहां तैनात एमडी मेडिकल ऑफिसरों की जानकारी मांगी गई है।
जरूरत है 80 एमडी की
होम्योपैथी निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार अभी तक कुल 38 एमडी डिग्री धारक मेडिकल ऑफिसर मिल गए हैं, जबकि आवश्यकता लगभग 80 एमडी मेडिकल ऑफिसर की है।
उम्मीद की जा रही है कि सोमवार तक सभी चिकित्सकों की जानकारी मिल जाएगी। प्रदेश में सात होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज हैं।
इनमें से अधिकतर में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके चलते केंद्रीय होम्योपैथी परिषद (सीसीएच) की तलवार हमेशा मेडिकल कॉलेजों पर लटकी रहती है।
मानक पूरा करने में जुटी सरकार
सीसीएच और आयुष मंत्रालय के डर का ही असर है कि, इस बार किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों की सीटों को सीपीएमटी-2013की काउंसलिंग में शामिल नहीं किया गया है। अब सरकार मानकों को पूरा करने की कवायद में जुटी है।
एमडी मेडिकल ऑफिसरों के बारे में जनपदों से जानकारी मांगी गई है। अब तक 38 एमडी मिल गए हैं। जरूरत 80 से अधिक शिक्षकों की है। जितने भी एमडी डिग्री धारक मिलेंगे, उनकी जानकारी शासन को भेजी जाएगी।
इसके बाद स्थायी तैनाती तक उनसे ही शिक्षण कार्य कराया जाएगा।