चुनाव से पहले मटेला प्रकरण की जांच फिर से खुलने जा रही है। अल्मोड़ा के मटेला में एक करोड़ से अधिक की लागत से बने कोल्ड स्टोर घपले की सीबीसीआईडी से जांच कराई गई थी। जिसमें शासन और विभाग के कुछ बड़े अफसरों के नाम सामने आए तो मामला शासन की फाइल में ही दबा रह गया। प्रकरण में अब शासन ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रभावित 46 किसानों को भी राहत दिए जाने की तैयारी है।
अल्मोड़ा मटेला में उद्यान विभाग के कोल्ड स्टोर को मै. यूए एग्रोकूप को वर्ष 2003 में 15 साल की लीज पर दिया गया था। कोल्ड स्टोर को लीज पर दिए जाने के साथ ही इसके संचालन के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी को एक करोड़ का ऋण दिया गया।
सरकार पर विश्वास कर किसानों ने इस कोल्ड स्टोर पर अपनी उपज रखी, लेकिन किसानों की 20 लाख रुपये से अधिक की फसल खराब हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की ओर से किसानों को जो चेक दिए गए वे सभी बाउंस हो गए।
अपराध अनुसंधान विभाग से प्रकरण की जांच कराई गई तो तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं वन व ग्राम्य विकास आयुक्त विभा पुरी दास, उद्यान सचिव संजीव चोपड़ा, तत्कालीन उद्यान निदेशक विनोद कुमार सिंघल, प्रबंधक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अजय कुमार शर्मा, बैंक के सहायक प्रबंधक शिव शंकर कानन और मुख्य प्रबंधक हरिकारत सिंह के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई।
2015 में ही प्रभारी सचिव ने शासन को लिखा था
कैग की रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर पहले भी सवाल उठाए हैं।
- फोटो : demo pic
वहीं उप निदेशक उद्यान आरसी श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव एसपी सुबुद्धि के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1) के तहत मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की गई। तीन जून 2015 को तत्कालीन प्रभारी सचिव उद्यान डॉ. निधि यादव ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए शासन के उच्च अधिकारियों को लिखा था, लेकिन प्रकरण अब तक शासन की फाइल से बाहर नहीं आ पाया।
अब अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने इस प्रकरण में संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिसके खिलाफ जो मामला बनता है उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
वहीं प्रभावित किसानों को राहत दी जा सके इसके लिए विभाग से इनकी लिस्ट सहित प्रस्ताव मांगा गया है। किसानों को राहत के लिए सरकार के स्तर पर सहमति बनने के बाद ही इस पर कार्रवाई होगी।
आयोग बना पर विस सत्र में नहीं रखी रिपोर्ट
uttarakhand assembly
प्रदेश में बीज आए बगैर इसका वितरण दर्शाए जाने के करोड़ों रुपये के ढैचा बीज घोटाले में जांच को त्रिपाठी आयोग गठित किया गया, आयोग ने 2015-16 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, लेकिन रिपोर्ट सौंपने के एक साल बाद भी इसे कार्रवाई के लिए विधान सभा सत्र में नहीं रखा जा सका है।
प्रदेश में करोड़ों रुपये के 15 हजार कुंतल ढैंचा बीज घोटाले में कृषि विभाग के कई बड़े अफसरों के नाम सामने आए थे। विभाग की ओर से मामले में चार मुख्य कृषि अधिकारियों के साथ ही 170 कर्मचारियों को आरोप पत्र दिए गए। कांग्रेस सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर त्रिपाठी आयोग से प्रकरण की जांच कराई, लेकिन आयोग की ओर से जांच रिपोर्ट सौंपने के एक साल बाद भी कार्रवाई एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में आयोग ने कई बड़े अधिकारियों के साथ ही एक पूर्व मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है, लेकिन रिपोर्ट अब तक विस सत्र में पेश न होने से मामला अब अगली सरकार तक के लिए टल गया है।